गेहूं उत्पन्न होते हैं, किसान की मांग पर प्रकृति ने श्रम (किसान का साथ दिया) किया, प्रकृति का साथ मिलने पर किसान ने श्रम किया, प्रकृति और किसान के सेवाओं (उनका श्रम) के आदान-प्रदान से गेहूं उत्पन्न हुआ, याद रहे गेहूं को किसी ने उत्पन्न नहीं किया, न प्रकृति ने और न किसान ने गेहूं उत्पन्न किया, उनके सेवाओं के आदान-प्रदान से गेहूं उत्पन्न हुआ, जिसे गेहूं की उपज (उत्पाद) कहा गया।
वस्तु, संसाधन सेवाएं आदि (वस्तु आदि) लोगों के सेवाओं के आदान-प्रदान से उत्पन्न होकर ‘वस्तु आदि’ उत्पाद कहलाते हैं। याद रहे उत्पाद उत्पन्न होते हैं, किन्हीं लोगों के सेवाओं के आदान-प्रदान के कारण उत्पाद उत्पन्न होते हैं, उत्पन्न ‘वस्तु आदि’ को उत्पाद कहते हैं।
उत्पाद उत्पन्न नहीं किए जाते हैं, उत्पाद के नाम पर जो कुछ किया जाता है, वह लोगों के सेवाओं का आदान-प्रदान किया जाता है, लोगों द्वारा अपने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।
जब उत्पाद किसी के द्वारा उत्पन्न नहीं किए जाते हैं,
तब उत्पादक कौन होगा, किसे उत्पादक कहेंगे, इसकी चर्चा करेंगे।
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4.03 उत्पादन
उत्पन्न किए जाने से ‘वस्तु आदि’ उत्पाद कहलाते हैं। उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया है, जिसके प्रथम चरण में व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ की मांग अन्य व्यक्ति के सम्मुख रखता है और उसे अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। बैंकनोट अन्य व्यक्ति को देना उसे सेवाएँ प्रदान करना ही है, क्योंकि किसी अन्य व्यक्ति को अपनी सेवाएँ प्रदान कर वह व्यक्ति बैंकनोट लेता है, जिसे (सेवाओं के बदले लिए गए बैंकनोट) वह अन्य व्यक्ति को दे रहा होता है, अर्थात् बैंकनोट देता हुआ व्यक्ति अपनी सेवाएं अन्य व्यक्ति को प्रदान कर रहा होता है।
उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया के द्वितीय चरण में वह अन्य व्यक्ति जिसे व्यक्ति की सेवाएँ अथवा बैंकनोट अदा हुए है, वह (अन्य व्यक्ति) ‘वस्तु आदि’ के मांग की आपूर्ति करता है। व्यक्ति तथा अन्य व्यक्ति के सेवाओं का अथवा उनके द्वारा दिए गए बैंकनोटों का और बदले में ‘वस्तु आदि’ का आदान-प्रदान उनके मध्य होने से ‘वस्तु आदि’ के मांग से उसकी आपूर्ति होने तक उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया दो या दो से अधिक चरणों में सम्पन्न (समापन) होती है।
किन्हीं व्यक्तियों के मध्य दो से अधिक चरणों में सेवाओं का आदान-प्रदान सम्पन्न होने के अवसरों पर ‘वस्तु आदि’ के आदान-प्रदान में बैंकनोटों के लेन-देन की दो सम्भावनाएँ हैं। पहली सम्भावना यह है कि प्रत्येक चरण में बैंकनोटों के भिन्न राशियों का लेन-देन होगा। दूसरी सम्भावना यह होगी की बैंकनोटों के किसी एक राशि का लेन-देन सब चरणों के सेवाओं के आदान-प्रदान में होगा।
बैंकनोटों के जितनी राशियों का लेन-देन सेवाओं के आदान-प्रदान में होता है उतनी संख्या में उत्पाद उत्पन्न होते हैं। बैंकनोटों की एक राशि के लेन-देन के अवसर पर सेवाओं के आदान-प्रदान में एक ही उत्पाद उत्पन्न होता है। उपरोक्त दो सम्भावनाओं के सम्बन्ध में दो उदाहरण यहाँ दिए गए हैं।
पहला उदाहरण
कोई किसान (उसने उत्पन्न किया है) गेहूँ का स्वामी है तथा कोई कुम्हार (निर्माता) घड़ा का स्वामी है।
कुम्हार किसी बुनकर को घड़ा देकर उससे बैंकनोटों की निर्धारित राशि ले रहा है तथा ‘किसान’ किसी चर्मकार को गेहूँ देकर उससे बैंकनोटों की निर्धारित राशि ले रहा है।
‘कुम्हार’ बैंकनोटों की निर्धारित राशि किसी शिक्षक को देता है तथा किसान भी बैंकनोटों की निर्धारित राशि उस शिक्षक को देता है।
शिक्षक अपनी सेवाएँ प्रदान कर बैंकनोटों की जो कुछ राशि कुम्हार तथा किसान से प्राप्त करता है, उस राशि में से बैंकनोटों की निर्धारित कोई राशि वह शिक्षक किसी श्रमिक को देकर उसकी सेवाएँ लेता है।
दिए गए उदाहरण में कुम्हार और बुनकर के बीच, किसान और चर्मकार के बीच, कुम्हार और शिक्षक के बीच, किसान और शिक्षक के बीच, शिक्षक और श्रमिक के बीच, भिन्न चरणों में सेवाओं का आदान-प्रदान जब होता है तो प्रत्येक चरण में सेवाओं का आदान-प्रदान बैंकनोटों के भिन्न राशियों के लेन-देन से सम्पन्न (समापन) होता है।
बैंकनोटों के जिस राशि का लेन-देन कुम्हार और बुनकर के बीच हो रहा है,
उसका सम्बन्ध घड़ा के निर्धारित मूल्य से है।
बैंकनोटों की जिस राशि का लेन-देन किसान और चर्मकार के बीच हो रहा है,
उसका सम्बन्ध गेहूँ के निर्धारित मूल्य से है।
बैंकनोटों की जिस राशि का लेन-देन कुम्हार और शिक्षक के बीच हो रहा है,
उसका सम्बन्ध शिक्षक के सेवाओं के निर्धारित मूल्य से है।
बैंकनोटों की जिस राशि का लेन-देन किसान और शिक्षक के बीच हो रहा है,
उसका सम्बन्ध शिक्षक के सेवाओं के निर्धारित मूल्य से है।
बैंकनोटों की जिस राशि का लेन-देन शिक्षक और श्रमिक के बीच हो रहा है, उसका सम्बन्ध श्रमिक के सेवाओं के निर्धारित मूल्य से है, जो अन्य चरणों में किए गए बैंकनोटों के लेन-देन से भिन्न है।
किसान को अदा हो रही शिक्षक की सेवाएँ और कुम्हार को अदा हो रही शिक्षक की सेवाएँ भिन्न हैं, इसलिए उन सेवाओं का निर्धारित मूल्य भी भिन्न हैं। घड़ा और गेहूँ का निर्धारित मूल्य भी भिन्न हैं, क्योंकि घड़ा और गेहूँ भिन्न दो उत्पाद है।
कुम्हार घड़ा निर्मित करता है, बुनकर बैंकनोट देकर बदले में, कुम्हार से घड़े का स्वामित्व प्राप्त कर, वह बुनकर घड़े को उत्पन्न करता है।
चर्मकार बैंकनोट देकर बदले में गेहूँ का स्वामित्व हासिल कर वह गेहूँ उत्पन्न करता है।
चर्मकार का उत्पाद गेहूँ है।
कुम्हार और किसान का उत्पाद शिक्षक की सेवाएँ हैं। शिक्षक का उत्पाद श्रमिक की सेवाएँ हैं। बैंकनोटों के जितनी राशियों का लेन-देन हो रहा है उतनी संख्या में उत्पाद उत्पन्न होते हैं।
दूसरा उदाहरण
इस्पात उद्योग में एक से अधिक विभाग और प्रत्येक विभाग में एक से अधिक कर्मचारी तथा उन कर्मचारियों के सेवाओं का आदान-प्रदान विभागीय तथा उद्योग स्तर पर एक से अधिक चरणों में सम्पन्न होता है।
किसी चरण में कर्मचारियों की जो कुछ सेवाएँ प्रदान होती हैं एवं बदले में जो कुछ सेवाएँ उन्हें अदा होती हैं तथा उस चरण के सेवाओं के आदान-प्रदान से जो कुछ उत्पन्न होता है, वह अगले चरण में हस्तांतरित होता है।
उद्योग के प्रत्येक चरण में सेवाओं के आदान-प्रदान से जो कुछ उत्त्पन्न हुआ उसे उस चरण का ‘उत्पादन’ कहते हैं।
प्रत्येक चरण का उत्पादन उसके अगले चरण में हस्तांतरित होकर उस अगले चरण का ‘उत्पादन’ बन जाता है।
अंतिम चरण के उत्पादन तक उत्पादन का हस्तांतरण होता है। अंतिम चरण का उत्पादन उद्योग का उत्पादन कहलाता है। अन्तिम चरण का उत्पादन वस्तुतः इस्पात है और यह उद्योग का उत्पादन है।
उद्योग के अंतिम चरण के उत्पादन की अदायगी उद्योग के स्वामी को होती है एवं बदले में निर्धारित बैंकनोटों की कोई राशि उसे वह व्यक्ति देता है जिस व्यक्ति की ‘इस्पात’ की मांग होती है।
उद्योग के स्वामी को दी गई बैंकनोटों की उस राशि का ही लेन-देन उद्योग में एक से अधिक चरणों में सेवाओं के आदान-प्रदान में होता है।
किसी अन्य व्यक्ति से ली गई बैंकनोटों की वह राशि, उद्योग का स्वामी वह व्यक्ति जिसे उत्पाद के उत्पादन के अन्तिम चरण के उत्पादन (इस्पात) का हस्तांतरण हुआ है, बैंकनोटों की उस राशि को वह व्यक्ति (उद्योग का स्वामी) पूर्व चरणों के उत्पादन से संलग्न अन्य व्यक्तियों में अवरोही क्रम में वितरित करता जाता है।
उद्योग में इस्पात के उत्पादन से संलग्न अनेकानेक व्यक्ति जहाँ प्रत्येक चरण का उत्पादन अगले चरण में उद्योग के स्वामी तक हस्तांतरित करते हैं, वहीं बैंकनोटों की राशि उद्योग के स्वामी से लेकर कार्यरत अनेकानेक वह व्यक्ति पूर्व चरणों में वितरित करते हैं।
उद्योग में उत्पाद (इस्पात) उत्पन्न करने की प्रक्रिया में उत्पाद के उत्पादन के भिन्न चरणों से संलग्न (जुड़े हुए) व्यक्ति जो उत्पादन उन्हें हस्तांतरित हुआ है, उसकी (उत्पादन) मांग पूर्व चरण के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति से करते हैं एवं वितरण के लिए प्रस्तुत बैंकनोटों की राशि उन्हें देते हैं।
बैंकनोटों की राशि दिए जाने से एवं उत्पादन (उत्पाद) की मांग किए जाने से उत्पाद के उत्पादन के भिन्न चरणों से संलग्न प्रत्येक व्यक्ति उत्पादन करते हैं।
उत्पाद के उत्पादन के भिन्न चरणों से संलग्न प्रत्येक व्यक्ति जहाँ पूर्व चरण के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति को बैंकनोटों की राशि देता है वहीं वह व्यक्ति अगले चरण के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति से बैंकनोटों की राशि लेता है।
लेन-देन में प्रयुक्त बैंकनोटों की वह राशि उस व्यक्ति द्वारा दी गई वह राशि होती है जो राशि उत्पाद (इस्पात) की मांग के बदले उत्पादन के अन्तिम चरण से संलग्न उद्योग के स्वामी किसी व्यक्ति को दी गई है एवं उसने (उद्योग का स्वामी) बैंकनोटों की उस राशि को उत्पाद के उत्पादन के भिन्न चरणों से संलग्न व्यक्तियों में वितरित होने के लिए प्रस्तुत किया है।
उद्योग में उत्पादन के भिन्न चरणों में बैंकनोटों की किसी एक राशि का लेन-देन होने से एक उत्पाद ‘इस्पात’ उत्पन्न हुआ है।
उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया कम से कम दो चरणों में सम्पन्न होती है और उस प्रक्रिया से कम से कम दो व्यक्ति संलग्न होते हैं। ‘वस्तु आदि’ की मांग रखना और उस मांग के संगत बैंकनोटों की राशि व्यय करना उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया का प्रथम चरण है, जिससे कम से कम एक व्यक्ति संलग्न होता है।
मांग की ‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति करना और उस आपूर्ति के संगत बैंकनोटों की राशि की आय उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया का अन्तिम व द्वितीय चरण है, जिससे कम से कम अन्य एक व्यक्ति संलग्न होता है।
उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया दो से अधिक चरणों में सम्पन्न होती हो एवं प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में एक अथवा एक से अधिक व्यक्ति संलग्न हों तो उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया के अन्तिम चरण के उत्पादन को जहाँ उत्पाद कहा जाता है, वहीँ …
उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया के शेष चरणों में से किसी एक अथवा अन्य किसी चरण से संलग्न एक व एक से अधिक किन्हीं व्यक्तियों के सेवाओं के आदान-प्रदान से उत्पन्न ‘वस्तु आदि’ को उद्योग में उत्पादन के उस चरण का उत्पादन कहते हैं।
उत्पादन इन शब्दों में परिभाषित होगा-
उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया के किसी चरण में उत्पन्न ‘वस्तु आदि’ उस चरण का उत्पादन है।
4.04 उत्पादक
किसी ‘वस्तु आदि’ का प्रयोग यदि व्यक्ति के लिए आवश्यक हो तो प्रयोग करने से पहले व्यक्ति को उस ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व हासिल करना होगा। व्यक्ति की आवश्यकताएँ दोहरी है-
एक तो व्यक्ति को आवश्यक ‘वस्तु आदि’ चाहिए और दूसरा कि आवश्यक ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व भी व्यक्ति को चाहिए। आवश्यक ‘वस्तु आदि’ व्यक्ति या तो उसका निर्माण करे अथवा वह ‘वस्तु आदि’ को उत्पन्न करे।
‘वस्तु आदि’ का निर्माण किए बिना अथवा उत्पन्न किए बिना ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व हासिल नहीं होगा और व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ का प्रयोग नहीं कर सकेगा।
‘वस्तु आदि’ का निर्माण करने वाला व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ को उत्पन्न नहीं करता है। कोई व्यक्ति किसी ‘वस्तु आदि’ को तभी उत्पन्न करता है जब व्यक्ति को ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व हासिल करना अभीष्ट हो।
इसके लिए वह व्यक्ति उस ‘वस्तु आदि’ की मांग उस अन्य व्यक्ति के सम्मुख प्रस्तुत करता है, जिस अन्य व्यक्ति के स्वामित्व में वह ‘वस्तु आदि’ है।
‘वस्तु आदि’ की मांग करते हुए ‘वस्तु आदि’ का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि ‘वस्तु आदि’ के स्वामी उस अन्य व्यक्ति को वह व्यक्ति देता है।
दिए गए बैंकनोटों की राशि लेकर ‘वस्तु आदि’ का स्वामी वह अन्य व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व व्यक्ति को हस्तांतरित करता है। ‘वस्तु आदि’ उत्पन्न हुआ कहा जाता है।
‘वस्तु आदि’ का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि देकर बदले में ‘वस्तु आदि’ की मांग करने से एवं मांग की आपूर्ति होने से ‘वस्तु आदि’ की मांग से प्रारंभ होकर ‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति तक ‘वस्तु आदि’ को उत्पन्न करने की प्रक्रिया जारी रहता है।
‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति ‘वस्तु आदि’ उत्पन्न करने की प्रक्रिया का अन्तिम चरण है, जो सम्पन्न होने से ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व उसे उत्पन्न करने वाले व्यक्ति को हस्तांतरित होता है।
उदाहरण के लिए कोई ग्रहस्थ अपने किसी आवश्यकता के लिए इस्पात का प्रयोग करना चाहता है। ग्रहस्थ कोई व्यक्ति चूँकि इस्पात का निर्माण नहीं कर सकता है, इसलिए वह व्यक्ति आवश्यक इस्पात को उत्पन्न करेगा।
इसके लिए बैंकनोटों की राशि इस्पात विक्रेता व्यापारी के हाथों देकर उससे इस्पात की मांग करेगा। इस्पात विक्रेता वह व्यापारी इस्पात के स्टॉकिस्ट किसी व्यापारी के हाथों इस्पात का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि देकर उससे इस्पात की मांग करेगा। इस्पात का स्टॉकिस्ट वह व्यापारी इस्पात उद्योग के महाप्रबन्धक के हाथों इस्पात का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि देकर उससे इस्पात की मांग करेगा।
इस्पात उद्योग का महाप्रबन्धक इस्पात का निर्माण तो करता नहीं है। महाप्रबन्धक वह व्यक्ति बैंकनोटों की राशि इस्पात उद्योग के विभिन्न विभागों में कार्यरत अनेक कर्मचारियों के हाथों देकर उनसे इस्पात की मांग करेगा।
उद्योग में इस्पात का निर्माण कई चरणों में होता है। प्रत्येक चरण में जितना कुछ निर्मित हुआ वह उस चरण का उत्पादन कहते हैं। उद्योग के भिन्न चरणों के उत्पादन का भी अगले चरण में हस्तांतरण वैसा ही होता है जैसे इस्पात का हस्तांतरण उद्योग के महाप्रबन्धक और स्टॉकिस्ट व्यापारी से व विक्रेता व्यापारी से ग्रहस्थ अन्य व्यक्तियों को होता है।
ग्रहस्थ द्वारा दी गई बैंकनोटों की राशि का वितरण ग्रहस्थ से विक्रेता व्यापारी व स्टॉकिस्ट व्यापारी से उद्योग के महाप्रबन्धक को तथा महाप्रबन्धक से उद्योग के अन्य कर्मचारियों को होता है।
इस्पात उत्पादन के पहले चरण से अन्तिम चरण तक बैंकनोटों की राशि का वितरण होने से इसे अन्य शब्दों में उत्पादन और वितरण की संज्ञा दी जाए तो उत्पाद का उत्पादन-वितरण उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
उत्पाद (इस्पात) के उत्पादन-वितरण की पक्रिया से उद्योग के सामान्य कर्मचारी से लेकर उद्योग के महाप्रबन्धक तक संलग्न हैं। इस्पात का स्टॉकिस्ट व्यापारी, विक्रेता व्यापारी, ग्रहस्थ आदि व्यक्ति भी उत्पाद के उत्पादन-वितरण की प्रक्रिया से संलग्न हैं, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति उत्पाद अथवा उत्पादन का हस्तांतरण अगले चरण में करता है एवं प्रत्येक व्यक्ति उत्पाद अथवा उत्पादन का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशियों का वितरण पूर्व चरणों में करता है।
ग्रहस्थ कोई व्यक्ति आवश्यक इस्पात (मांग) का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि इस्पात विक्रेता व्यापारी को देकर इस्पात उत्त्पन्न करता है एवं उत्पन्न वह इस्पात ग्रहस्थ उस व्यक्ति का उत्पाद है।
इस्पात विक्रेता व्यापारी आवश्यक इस्पात (मांग) का निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि उद्योग के महाप्रबन्धक को देकर इस्पात उत्पन्न करता है एवं उत्पन्न वह इस्पात स्टॉकिस्ट उस व्यापारी का उत्पाद है।
उद्योग का महाप्रबन्धक उद्योग के विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को इस्पात निर्माण में उनके सेवाओं के लिए बैंकनोटों की राशि देकर उनके द्वारा उत्पन्न किए गए उत्पाद की आपूर्ति व्यापारी को करता है।
उद्योग के सामान्य कर्मचारी से लेकर महाप्रबन्धक तक प्रत्येक व्यक्ति उत्पादन-वितरण से संलग्न होकर अपने स्तर पर उत्पाद अथवा उत्पादन (इस्पात) को वह उत्पन्न करते हैं।
जिस उत्पाद (इस्पात) को ग्रहस्थ किसी व्यक्ति ने उत्पन्न किया, उस उत्पाद को विक्रेता व्यापारी भी उत्पन्न करता है, उसी उत्पाद को स्टॉकिस्ट व्यापारी भी उत्पन्न करता है, उसी उत्पाद को उद्योग का महाप्रबन्धक भी उत्पन्न करता है। उद्योग का महाप्रबन्धक जिस उत्पाद (इस्पात) को उत्पन्न करता है वह उद्योग के अन्तिम चरण का उत्पादन है।
उद्योग के अन्य प्रत्येक चरण का उत्पाद अगले चरण के उत्पादन में हस्तांतरित होकर उद्योग का उत्पादन उत्पाद कहलाता है जिसका हस्तांतरण ग्रहस्थ किसी व्यक्ति तक हुआ है।
इस सम्बन्ध में सत्य यही है कि उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न प्रत्येक व्यक्ति उत्पादक है। उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न प्रत्येक व्यक्ति उत्पाद या उत्पादन के स्वामित्व का हस्तांतरण अगले चरण में करते हुए बदले में बैंकनोटों की राशि लेता है।
बैंकनोटों की राशि प्रत्येक व्यक्ति उत्पाद के उत्पादन-वितरण के पूर्व चरण से संलग्न अन्य व्यक्ति को देकर बदले में उस चरण के उत्पाद अथवा उत्पादन का स्वामित्व हासिल करता है और उत्पाद उत्पन्न करता है अथवा उत्पादन करता है अर्थात् उत्पादक की भूमिका में होता है।
उत्पादक की भूमिका में, उत्पाद उत्पन्न करने की प्रक्रिया में, उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न व्यक्तियों को बैंकनोटों की राशियाँ दी जाती हैं, बैंकनोटों की यह राशि ही उत्पाद (वस्तु आदि) का मूल्य निर्धारित होता है।
‘वस्तु आदि’ के निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की निर्धारित किसी राशि में कहीं कुछ भी स्पष्ट नहीं होता है कि उसके उत्पादन से संलग्न किस-किस व्यक्ति को बैंकनोटों की कितनी-कितनी राशि दी गई है।
इस विषय को ऐसा कहा जा सकता है कि ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न एक से अधिक किन्हीं व्यक्तियों को उनके सेवाओं के लिए दिए गए बैंकनोटों की भिन्न राशियाँ ‘वस्तु आदि’ के निर्धारित मूल्य बैंकनोटों की राशि में अभिन्न होकर प्रस्तुत होता है।
‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न किसी भी व्यक्ति को उसके सेवाओं के लिए दी गई बैंकनोटों की राशि ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न एक से अधिक किन्हीं व्यक्तियों को अर्थात् किसी व्यक्तिसमुदाय को उनके सेवाओं के लिए दी गई बैंकनोटों की कुल राशि के साथ चूँकि अभिन्न होकर प्रस्तुत होता है और
व्यक्ति की सेवाएँ उसका श्रम है तथा बैंकनोट व्यक्ति के सेवाओं (श्रम) को मापने का साधन है, इसलिए ‘वस्तु आदि’ का मूल्य बैंकनोटों की कोई राशि निर्धारित होने के क्रम में ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति का श्रम (सेवाएँ) व्यक्तिसमुदाय (एक से अधिक व्यक्तियों) के श्रम के साथ अभिन्न होकर प्रस्तुत होता है।
व्यक्तिसमुदाय के श्रम के साथ अभिन्न व्यक्ति का श्रम व्यक्ति का उद्योग कहलाता है। व्यक्ति का उद्योग उसका ‘श्रम’ ही है। व्यक्ति उद्योग (श्रम) करता है। व्यक्ति के उद्योग से ‘वस्तु आदि’ का उत्पादन होने से ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से जुड़े इकाईयों को उद्योग इकाईयाँ कहते हैं। उद्योग इकाईयों में व्यक्ति द्वारा किया गया ‘श्रम’ उसका उद्योग बनकर प्रकट होता है।
निर्धारित बैंकनोटों की जिन राशियों का लेन-देन उत्पाद के उत्पादन-वितरण में होता है बैंकनोटों की वह राशि उत्पाद का मूल्य निर्धारित होकर उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न व्यक्तियों के श्रम को उनका उद्योग बनाकर प्रस्तुत करता है,
अर्थात् उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न व्यक्ति उद्योगरत होते हैं। उत्पाद के उत्पादन-वितरण से संलग्न व्यक्ति चूँकि उत्पादक हैं, इसलिए उद्योगरत प्रत्येक व्यक्ति उत्पादक कहलाता है।
उत्पादक इन शब्दों में परिभाषित होगा : उद्योगरत व्यक्ति उत्पादक है।