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1.12 मुद्रा क्या है?
जिसे रुपए कहते हैं, वही बैंकनोट हैं, उसे ही मुद्रा भी कहते हैं। रुपए, बैंकनोट, मुद्रा समान होते हुए भी उन तीन शब्दों के प्रयोग में अन्तर है। रिज़र्व बैंक के लिए जो ‘बैंकनोट’ हैं, वही व्यक्ति के लिए ‘रुपए’ हैं जिन्हें वह ‘आय’ में प्राप्त (लेता) करता है। ‘आय’ में प्राप्त रुपयों के ‘व्यय’ (देने) के अवसर पर आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ‘रुपए’ बने जिन बैंकनोटों का लेन-देन लोग करते हैं, वह बैंकनोट ‘मुद्रा’ कहलाते हैं। जो बैंकनोट मुद्रा कहलाए वह वही बैंकनोट हैं जिन्हें रिज़र्व बैंक ने जारी किया है और वह रिज़र्व बैंक द्वारा जारी वही बैंकनोट हैं जिन्हें लोगों ने ‘आय’ में प्राप्त कर ’रुपए’ कहा है।
उदाहरण के लिए बाल्यावस्था में जिस महिला को कोई व्यक्ति बेटी कहता है, उस महिला की शादी के बाद वह अन्य किसी व्यक्ति की बहू कहलाती है और सन्तान को जन्म देकर वही महिला अपने सन्तान की माता कहलाती है। किसी माता की सन्तान कोई बेटी, बहू बनी, माता बनी, पुनः बेटी को उसने जन्म दिया, यह विषय रुपए, बैंकनोट, मुद्रा के साथ लागू होता है।
रिज़र्व बैंक द्वारा जारी बैंकनोटों (बेटी) के लेन-देन के अवसर पर किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्ति को दिए जाने पर वही बैंकनोट अन्य व्यक्ति की आय रुपए (बहू) कहलाती है। आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रुपए (बहू) बने जिन बैंकनोटों का लेन-देन लोग करते हैं, वह बैंकनोट मुद्रा (माता) कहलाते हैं। मुद्रा (माता) भूमिका में रिज़र्व बैंक द्वारा जारी बैंकनोटों (बेटी) के लेन-देन के भिन्न अवसरों पर वह बैंकनोट (बेटी) लोगों के आय(बहू)-व्यय (माता) की निरन्तरता को बनाए रखता है
लोगों की बैंकनोटों की ‘आय’ तथा लोगों द्वारा किया गया बैंकनोटों का ‘व्यय’ लोगों द्वारा किए जा रहे बैंकनोटों के लेन-देन के भिन्न दो अवसर हैं। बैंकनोटों की ‘आय’ के अवसर पर दिए गए बैंकनोटों को लेने वाला (लेन-देन का एक अवसर) अन्य व्यक्ति उन्हें ‘रुपए’ कह कर आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह व्यक्ति रुपए बने उन बैंकनोटों का वह व्यक्ति ‘व्यय’ करता है, यह बैंकनोटों के लेन-देन का अन्य अवसर है, जब रुपए ‘मुद्रा’ कहलाते हैं। मुद्रा बने बैंकनोटों के लेन-देन से लोगों के आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, जब लोग बैंकनोट ‘व्यय’ कर रहे होते हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी (बेटी-बहू-माता-बेटी) लोगों का जीवन जारी रहता है, वैसा ही बैंकनोटों के लेन-देन का घटनाक्रम (बैंकनोट-रुपए-मुद्रा-बैंकनोट) जारी रहता है, जहां दिए (देना) गए बैंकनोट (बेटी) रुपए (बहू) के नाम पर किसी व्यक्ति द्वारा लिए (लेना) जाते हैं और मुद्रा (माता) के नाम पर उस व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति होने के अवसर पर रुपयों के व्यय के साथ वह बैंकनोट (बेटी) किसी अन्य व्यक्ति को दिया (देना) जाता है। दिए गए बैंकनोट रुपए के नाम पर लेना और मुद्रा के नाम पर उन बैंकनोटों को दिए जाने के अवसर पर जिस अनुपात में लोगों के आवश्यकताओं की पूर्ति होती है उस अनुपात में रुपए अथवा बैंकनोटों का मूल्य निर्धारित होता है जिसे मुद्रा कहा गया है। मुद्रा का अर्थ रुपए अथवा बैंकनोटों के मूल्य से है। रुपए के उस मूल्य की या कहें मुद्रा की चर्चा करेंगे।
1.13 मुद्रा का मान
‘मुद्रा’ का विचार जब भी होगा, आय-व्यय से संलग्न (जुड़ा होना) किसी व्यक्ति को केन्द्र में रखकर विचार होगा। बैंकनोटों के आय-व्यय से संलग्न व्यक्ति वयस्क रोजगार प्राप्त व्यक्ति हैं, जिन्हें बैंकनोटों की आय होती है। वयस्क रोजगार प्राप्त व्यक्ति अपने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एवं उस पर निर्भर अन्य व्यक्तियों के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी आय में प्राप्त रुपए व्यय करते हैं।
कोई व्यक्ति जब अपने आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ उस पर निर्भर अन्य व्यक्तियों के आवश्यकताओं की पूर्ति भी करता है तो व्यक्ति भरण-पोषण की व्यवस्था में लगा हुआ कहा जाता है।
भरण शब्द का सम्बन्ध भरने से व पेट भरने से है जिसका व्यापक अर्थ अपने आवश्यकताओं की पूर्ति करने से है। ‘पोषण शब्द का सम्बन्ध पालने पोसने से है जिसका व्यापक अर्थ निर्भर अन्य व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति करने से है। आय-व्यय से संलग्न रोजगार प्राप्त व्यक्ति बैंकनोटों के लेन-देन में भरण-पोषण की व्यवस्था से संलग्न (जुड़ा होना) होता है।
कोई व्यक्ति उस पर निर्भर जिन कुछ व्यक्तियों के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बैंकनोट व्यय करता है, वह उसके माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी अथवा पति या बच्चे, अन्य कोई सगे सम्बन्धी आदि हो सकते हैं। आय से संलग्न व्यक्ति व उसके सगे सम्बन्धियों से मिलकर बनी रचना को सामान्य बोलचाल में ‘परिवार’ कहते हैं।
परिवार में कम से कम एक व्यक्ति अवश्य होगा जिसे बैंकनोटों की आय होगी। कुछ परिवार ऐसे भी हो सकते हैं जिसमें एक से अधिक व्यक्तियों को बैंकनोटों की आय हो रही होगी एवं उन पर परिवार के अन्य व्यक्ति निर्भर होंगे।
आय से संलग्न व्यक्ति एक से अधिक की संख्या में जिस किसी परिवार में हों एवं परिवार के अन्य व्यक्ति आय से संलग्न उन व्यक्तियों पर निर्भर हों तो वैसे परिवार को सुंयुक्त परिवार कह सकते हैं। संयुक्त परिवारों की रचना को स्वीकारते हुए भी किसी ‘इकाई परिवार’ की रचना को आधार बनाकर ‘मुद्रा के मान’ के सम्बन्ध में विचार करना होगा और इसके लिए किसी ‘परिवार इकाई के भरण-पोषण की व्यवस्था का विचार करना होगा।
आय से संलग्न व्यक्ति स्वयं एवं उस पर निर्भर अन्य कम से कम तीन व्यक्तियों से मिलकर जिस परिवार की रचना होगी वैसे परिवार के सम्बन्ध में यह मान्यता स्थापित है कि वह सबसे छोटा परिवार होगा। उस परिवार की आवश्यकताएँ कम होंगी तथा परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करने के लिए कोई भी व्यक्ति सुविधाजनक स्थिति में होगा।
ऐसे छोटे परिवार को ‘इकाई परिवार की संज्ञा देकर आय से संलग्न व्यक्ति पर निर्भर अन्य तीन व्यक्ति से बने किसी परिवार इकाई के भरण-पोषण की व्यवस्था के लिए प्रतिमास जिस माप में बैंकनोट व्यय करना किसी व्यक्ति के लिए आवश्यक है, उसे आधार मानकर रोजगार प्राप्त व्यक्ति के लिए आवश्यक न्यूनतम आय निर्धारित करना एवं उस आय-व्यय के अन्तर्गत वह व्यक्ति जिस माप में बैंकनोटों का लेन-देन करता है, बैंकनोटों के उस माप का विचार ‘मुद्रा’ के नाम से होगा।
व्यक्ति स्वयं एवं उस पर निर्भर अन्य कम से कम तीन व्यक्ति के ‘परिवार इकाई के भरण-पोषण की व्यवस्था में प्रतिमास के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिस माप में बैंकनोट व्यय करना किसी व्यक्ति के लिए आवश्यक होगा, बैंकनोटों का वह माप (मान) आवश्यक किन्हीं वस्तु, संसाधन, सेवाओं के मूल्यनिर्धारण पर निर्भर करता है।
‘वस्तु आदि’ का मूल्यनिर्धारण यदि अपेक्षाकृत बैंकनोटों के कम माप में हुआ तो परिवार इकाई के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी व्यक्ति को प्रतिमास कम माप में बैंकनोट व्यय करना पड़ेगा। ‘वस्तु आदि’ का मूल्यनिर्धारण अपेक्षाकृत बैंकनोटों के अधिक माप में हुआ तो प्रतिमास न्यूनतम उन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अधिक माप में बैंकनोट व्यय करना उस व्यक्ति के लिए आवश्यक होगा।
आवश्यक ‘वस्तु आदि’ के मूल्यनिर्धारण के किन्हीं परिस्थितियों में स्थान विशेष पर किसी परिवार इकाई के भरण-पोषण के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्धारित जिस माप में प्रतिमास बैंकनोट व्यय करना रोजगार प्राप्त किसी व्यक्ति के लिए आवश्यक होगा, रोजगार प्राप्त अन्य किसी भी व्यक्ति के लिए वहां किसी परिवार इकाई के भरण-पोषण के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिमास निर्धारित उसी माप में बैंकनोट व्यय करना आवश्यक होगा।
रोजगार प्राप्त किसी व्यक्ति के लिए किसी स्थान विशेष पर परिवार इकाई के भरण-पोषण के लिए प्रतिमास किस माप में बैंकनोट व्यय करना आवश्यक होगा यह निर्धारित हो जाने से, रोजगार प्राप्त व्यक्ति को उस स्थान विशेष पर प्रतिमास उसके सेवाओं के लिए कम से कम किस माप में बैंकनोटों की आय उसे होनी चाहिए यह निर्धारित किया जा सकता है।
रोजगार प्राप्त कोई व्यक्ति चाहे वह मजदूर हो या उद्योगपति हो अथवा कोई व्यापारी या कृषक अथवा कारीगर हो, प्रत्येक व्यक्ति अवकाश आदि के अतिरिक्त प्रतिमास औसत पच्चीस कार्यदिवस एवं प्रति कार्यदिवस औसत आठ घण्टे अर्थात् प्रतिमास कम से कम औसत ‘200 घण्टे’ अपनी सेवाएँ प्रदान कर वह बैंकनोटों की आय कर सकता है।
आय से संलग्न प्रत्येक व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए समान रूप से उस माप में बैंकनोट अवश्य दिया जाना चाहिए अर्थात् देय’ होगा जिससे कि वह प्रतिमास औसत 200 घण्टे की सेवाएँ कम से कम प्रदान कर बदले में प्रतिमास वह व्यक्ति कम से कम उस माप में बैंकनोटों की आय कर सके कि उस माप में बैंकनोटों (रुपए) के व्यय से (देकर) वह व्यक्ति परिवार इकाई के भरण-पोषण की व्यवस्था में प्रतिमास के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति वह कर सके।
परिवार इकाई के भरण-पोषण की व्यवस्था में रोजगार प्राप्त किसी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए समान रूप से देय बैंकनोटों का जो कुछ माप निर्धारित होगा, निर्धारित उस माप के बैंकनोटों का लेन-देन रोजगार प्राप्त कोई भी व्यक्ति भरण-पोषण की व्यवस्था में आय-व्यय के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से करेगा, क्योंकि निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सब परिस्थितियों में रोजगार प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति पर निर्भर प्रत्येक परिवार की अनिवार्य आवश्यकता है।
भरण-पोषण की व्यवस्था में रोजगार प्राप्त किसी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे के सेवाओं के लिए समान रूप से देय उस माप के बैंकनोट जिनका लेन-देन रोजगार प्राप्त व्यक्ति आय-व्यय के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से करता है, उसे मुद्रा का आधार मान कह सकते हैं, अर्थात् मुद्रा का मानक कह सकते हैं।
मुद्रा का मानक अर्थात् मुद्रा का इकाई मान या एक मुद्रा अथवा सहज ही ‘मुद्रा का मान’ निर्धारित उस माप के बैंकनोटों को कह सकते हैं जिस माप में बैंकनोट रोजगार प्राप्त किसी भी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए समान रूप से सबको अवश्य दिया जाना चाहिए।
भरण-पोषण की व्यवस्था में रोजगार प्राप्त व्यक्ति स्वयं एवं उस पर निर्भर तीन व्यक्ति के परिवार इकाई के प्रतिमास के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं को निर्धारित कर लिया जाए तो ‘वस्तु आदि’ के मूल्यनिर्धारण की किन्हीं परिस्थितियों में निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समान रूप से जिस माप में बैंकनोट किसी व्यक्ति को प्रतिमास व्यय करना आवश्यक होगा इसे निर्धारित किया जा सकता है।
मान लिया यह प्रतिमास ‘2000 रुपए’ माप के बैंकनोट निर्धारित होता है। अतः किसी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए समान रूप से 10 रुपए माप के बैंकनोट’ अवश्य दिया जाना चाहिए ताकि वह प्रतिमास कम से कम 200 घण्टे की सेवाएँ प्रदान कर औसत 2000 रुपए माप के बैंकनोट आय में प्राप्त कर सके एवं वह स्वयं अपना तथा उस पर निर्भर अन्य कम से कम तीन व्यक्तियों के भरण-पोषण की व्यवस्था में उनके प्रतिमास के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति वह व्यक्ति कर सके।
‘वस्तु आदि’ के मूल्यनिर्धारण के उन परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए देय न्यूनतम 10 रुपए माप के बैंकनोट एक ‘मुद्रा’ व सहज ही ‘मुद्रा’ कहलाएगा। ‘मुद्रा का मान 10 रुपए माप अंकित बैंकनोट निर्धारित होगा।
‘मुद्रा’ का मान 10 रुपए माप के बैंकनोट निर्धारित हो एवं किसी व्यक्ति को उसके प्रतिघंटे की सेवाओं के लिए 50 रुपए माप के बैंकनोट दिए जाते हों तो उसे उसके प्रतिघंटे के सेवाओं के लिए ‘5 मुद्रा’ दिया गया है कहा जाएगा।
वह व्यक्ति जिसे प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए ‘3 मुद्रा’ दिए जाते हों अर्थात् 30रुपए माप के बैंकनोट दिए जाते हों एवं व्यक्ति को किसी मास 150 घण्टे की सेवाएं प्रदान करने के अवसर (रोजगार) प्राप्त होता है तो व्यक्ति की आय 450 मुद्रा के लिए निर्धारित माप के बैंकनोट अर्थात् ‘4500रुपए’ उस व्यक्ति की आय होगी जिसमें से वह ‘200 मुद्रा’ के लिए निर्धारित माप के बैंकनोट अर्थात् 2000रुपए व्यय कर परिवार इकाई के प्रतिमास के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेगा एवं शेष 2500 रुपए (बैंकनोट) व्यय कर अतिरिक्त अन्य कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति वह कर सकेगा।
‘वस्तु आदि’ के मूल्यनिर्धारण के अन्य परिस्थितियों में मान लिया मुद्रा का मान निर्धारित 25 रुपए माप के बैंकनोट हैं। इन परिस्थितियों में यदि व्यक्ति को किसी मास 4000रुपए के बैंकनोटों की आय होती हो तो भी वह व्यक्ति उस मास भरण पोषण की व्यवस्था में परिवार इकाई लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कम से कम 200मुद्रा के लिए निर्धारित माप के बैंकनोट प्रतिमास व्यय करना किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक होगा।
मुद्रा का मान निर्धारित 25रुपए होने से व्यक्ति के लिए 5000 रुपए माप के बैंकनोट (200×25) किसी मास व्यय करना आवश्यक होने से, चूंकि व्यक्ति को मासिक 4000 रुपए माप के बैंकनोटों की आय हुई है, इसलिए वह व्यक्ति भरण पोषण की व्यवस्था में परिवार इकाई के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकेगा।
1.14 मुद्रा की परिभाषा
एक ‘मुद्रा’ बैंकनोटों का निर्धारित वह माप है जो रोजगार प्राप्त किसी भी व्यक्ति को समान रूप से उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए न्यूनतम दिया ही जाना चाहिए, जिससे कि वह औसत कम से कम दो सौ घण्टे की सेवाएँ प्रदान कर बदले वह स्वयं अपना तथा उस पर निर्भर अन्य कम से कम तीन व्यक्तियों के भरण-पोषण की व्यवस्था में परिवार इकाई के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति वह प्रतिमास कर सके।
‘रुपए’ व्यक्ति के सेवाओं के माप की इकाई है और बैंकनोट व्यक्ति के सेवाओं को मापने का साधन हैं। किसी वस्तु, संसाधन, सेवाएँ आदि का मूल्य जैसे 65 रुपए कोई माप ही है और यह निर्धारित वैसा ही माप है जैसे किसी की लम्बाई का माप (5 मीटर) मीटर इकाई में निर्धारित होता है।
उदाहरण के लिए किसी वस्तु की लम्बाई 3 मीटर कहा जाए एवं उस वस्तु का मूल्य ’18 रुपए’ कहा जाए तो यह दोनों समान किसी वस्तु के भिन्न दो माप हैं। ‘मीटर इकाई में माप ‘3 मीटर’ वस्तु के लम्बाई को दर्शाता है। रुपए इकाई में माप ‘18 रुपए’ वस्तु आदि के उत्पादन-वितरण से संलग्न व्यक्तियों को उनके सेवाओं के लिए उन्हें दिए गए बैंकनोटों (रुपए) के माप को दर्शाता है।
वस्तु की लम्बाई मीटर इकाई में निर्धारित करने के लिए मीटर माप अंकित छड या फीता आदि माप के साधनों का प्रयोग किया जाता है। ‘वस्तु आदि’ का मूल्य रुपए इकाई में निर्धारित करने के लिए रुपए माप अंकित बैंकनोट जैसे माप के साधनों का प्रयोग किया जाता है।
वस्तु की लम्बाई का माप निर्धारित करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले मीटर माप छड या फीता आदि के ‘माप का मानक अवश्य होता है। माप का वह मानक स्वयं इकाई ‘माप’ है, अर्थात् माप का मानक जितनी लम्बी है, उसकी लम्बाई को इकाई अर्थात् ‘एक’ मानकर वस्तु की लम्बाई ‘माप के मानक’ से कितनी गुनी है, उतनी इकाइयां वस्तु के लम्बाई का माप निर्धारित होता है।
व्यक्ति के सेवाओं को मापने का साधन बैंकनोटों का भी माप का ‘मानक’ अवश्य होगा। ‘मुद्रा’ ही माप का वह मानक है जिसके आधार पर किसी व्यक्ति को उसके किन्हीं सेवाओं के लिए किस माप में बैंकनोट दिए जाएं यह निर्धारित होता है।
बैंकनोटों के माप का मानक ‘मुद्रा’ है, जो स्वयं माप है। रोजगार प्राप्त व्यक्ति स्वयं एवं उस पर निर्भर तीन व्यक्ति के किसी इकाई परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था का आधार लेकर मुद्रा का मान निर्धारित होता है। भरण-पोषण की व्यवस्था से तात्पर्य स्वयं व्यक्ति एवं उस पर निर्भर अन्य व्यक्तियों के आवश्यकताओं की पूर्ति से है, जिसके लिए रोजगार प्राप्त व्यक्ति बैंकनोटों का लेन-देन करता है।
बैंकनोटों के लेन-देन में वस्तु, संसाधन, सेवाएँ आदि की व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति किस अनुपात में होगा यह ‘मुद्रा के मान’ अर्थात् व्यक्ति के सेवाओं के माप के मानक पर निर्भर करता है। मुद्रा व्यक्ति के सेवाओं के माप का मानक है, कहने का अभिप्राय यही है।
सेवाओं के माप के मानक (मुद्रा का मान) पर रोजगार प्राप्त व्यक्ति के भरण-पोषण की व्यवस्था निर्भर करती है और ‘मुद्रा का मान’ इस बात पर निर्भर करता है कि रोजगार प्राप्त व्यक्ति ने समुदाय स्तर पर अन्य व्यक्तियों के आवश्यकताओं की पूर्ति किस अनुपात में किया है और बदले में स्वयं उसके आवश्यकताओं की पूर्ति किस अनुपात में होती है।
रोजगार प्राप्त व्यक्ति आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्धारित किसी माप के बैंकनोटों के लेन-देन में बदले में निर्धारित उस मूल्य के ‘वस्तु आदि का आदान-प्रदान करता है। इस लेन-देन व आदान-प्रदान में समुदाय स्तर पर व्यक्ति तथा अन्य व्यक्ति चूँकि अपने सेवाओं का ही वस्तुतः वह आदान-प्रदान करते हैं, इसलिए समुदाय स्तर पर सेवाओं का आदान-प्रदान करने की रोजगार प्राप्त व्यक्ति की भूमिका पर ‘मुद्रा का मान’ निर्भर है।
जिसे (मुद्रा) हम व्यक्ति के सेवाओं के माप का मानक कहते हैं, वह वस्तुतः व्यक्ति के सेवाओं के आदान-प्रदान के माप का मानक है व अन्य शब्दों में व्यक्ति के सेवाओं के आदान-प्रदान का इकाई माप (मानक) है। रुपए व्यक्ति के सेवाओं के माप की इकाई है। बैंकनोट व्यक्ति के सेवाओं को मापने के साधन है। माप की इकाई और साधन जहाँ होंगे, वहाँ माप का मानक अवश्य होगा। ‘मुद्रा’ व्यक्ति के सेवाओं के माप का मानक है।
मुद्रा का मान बैंकनोटों का निर्धारित कोई माप है और बैंकनोटों का निर्धारित वह माप (मुद्रा का मान) व्यक्ति के सेवाओं के माप का मानक बनकर समुदाय स्तर पर व्यक्ति के सेवाओं के अदान-प्रदान के माप का मानक अर्थात् माप की इकाई होगी।
मुद्रा का मान बैंकनोटों का निर्धारित वह माप है, जिस भाप में बैंकनोट रोजगार प्राप्त किसी भी व्यक्ति को उसके प्रतिघण्टे की सेवाओं के लिए सबको समान रूप से न्यूनतम दिया जाना चाहिए, जिससे कि वह प्रतिमास औसत कम से कम 200 घण्टे की सेवाएँ प्रदान कर बदले में उस पर निर्भर तीन व्यक्ति के परिवार इकाई के प्रतिमास के न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति वह कर सकें।
आवश्यकताओं की पूर्ति के संदर्भ में, भरण-पोषण की व्यवस्था के अन्तर्गत, बैंकनोटों के लेन-देन में बदले में ‘वस्तु आदि’ के आदान-प्रदान में रोजगार प्राप्त व्यक्ति व्यापक अर्थ में समुदाय सतर पर अपना एवं अन्य अनेक व्यक्तियों के सेवाओं का ही आदान-प्रदान करता है, इसलिए मुद्रा को व्यक्ति के सेवाओं के आदान-प्रदान के माप की इकाई कहा गया है।
रुपए व्यक्ति के सेवाओं के माप की इकाई है।
मीटर लीटर, किलो आदि इकाईयों की भांति ‘रुपए’ व्यक्ति के सेवाओं के माप की इकाई है।
बैंकनोट व्यक्ति के सेवाओं को मापने का साधन है।
मीटर माप अंकित छड़, लीटर माप का मग, किलो माप अंकित बटखरा आदि माप के अन्य साधनों की भांति बैंकनोट व्यक्ति के सेवाओं के माप का साधन मात्र है।
मुद्रा व्यक्ति के सेवाओं के आदान-प्रदान के माप की इकाई है। व्यापक अर्थ में रुपए अथवा बैंकनोटों के मूल्य को मुद्रा कह सकते हैं। बैंकनोटों पर लिखा 50रुपए, 100रुपए आदि नहीं बदलते, परन्तु उन बैंकनोटों का मूल्य समय-समय पर बदलता है। बैंकनोटों के उस मूल्य को ‘मुद्रा’ कहते हैं, जो समय-समय पर बदलता है।
उदाहरण के लिए 60 रुपए के बदले एक डालर दिया जाना अथवा एक डालर के बदले 60 रुपए दिया जाना, इस प्रसंग में रुपए और डालर के आदान-प्रदान की इकाई ‘डालर’ है। एक (इकाई) डालर 80 रुपए अथवा 90 रुपए आदि रुपए का डालर इकाई (एक डालर) में मूल्य है, जो समय-समय पर बदलता है। यह अन्तराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मुद्रा का मान या कहें भारतीय रुपए अथवा बैंकनोटों का मूल्य है।
भारतीय बाजार में रुपए अथवा बैंकनोटों का मूल्य भारत में भारतीय मुद्रा का मान है, एक मुद्रा समय-समय पर 10रुपए, 20रुपए आदि मान लिए हो सकता है। मुद्रा (10रुपए, 20रुपए आदि) व्यापक अर्थ में व्यक्ति तथा अन्य व्यक्ति के सेवाओं के आदान-प्रदान की इकाई है।
मुद्रा का मान (10रुपए मान लेने पर) व्यक्ति को उसके प्रतिघंटे की सेवाओं के लिए कम से कम 10रुपए अवश्य दिया जाना चाहिए, अधिकतम कितना भी दिया जा सकता है। किसी व्यक्ति को उसके सेवाओं के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपए दिए जाते हों तो उसे प्रतिघंटा (1,00,000/12*200) औसतन 4मुद्रा दिए गए।
काबिलियत के आधार पर किसी व्यक्ति को उसे प्रतिघंटा 8, 10 मुद्रा भी दिए जा सकते हैं। मुद्रा का मान ‘10रुपए’ होने की अवस्था में किसी व्यक्ति को प्रतिघंटे ‘2मुद्रा’ दिए जाते हों तो उसे प्रतिमास (2*10*200रुपए) 4000रुपए देय होंगे। बाजार की बदली हुई परिस्थिति में मुद्रा का मान ‘12रुपए’ निर्धारित होता है तो उसे (2*12*200रुपए) 4800रुपए प्रतिमास देय होंगे।
मुद्रा का आधार लेने पर वेतनवृद्धि आवश्यक नहीं होगा, वेतन स्वयंमेव निर्धारित होता जाएगा। बाजार की बदली हुई परिस्थिति में मुद्रा का मान ‘7रुपए’ निर्धारित होता है तो उसे (2*7*200रुपए) 2800रुपए प्रतिमास देय होंगे।
मुद्रा का मान 10रुपए से 12रुपए होने पर बाजार में रुपए कमजोर हुआ कहा जाएगा, इसके विपरीत मुद्रा का मान 10रुपए से 7रुपए होने पर बाजार में रुपए मजबूत हुआ कहा जाएगा, तदनुसार वेतनवृद्धि या वेतन में कटौती का प्रावधान होने से व्यक्ति के जीने की परिस्थितियां यथावत बनी रहेंगी।