आवश्यक ‘वस्तु आदि’ के मांग-आपूर्ति के संगत लोगों की रुपयों में आय-व्यय का घटनाक्रम बाजार है।
बाजार का रेखांकन (लेखाचित्र) की चर्चा करते हुए हमने विस्तार से स्पष्ट किया है कि बैंकनोटों पर लिखा “मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूं” इस वचनखण्ड के लेखाचित्र का रेखांकन बाजार के लेखाचित्र का रेखांकन है। इस लेखाचित्र के रेखांकन की विधि एवं उद्देश्य आदि को लेखाचित्र रेखांकन शीर्षक से हम स्पष्ट कर चुके हैं। यहां बाजार के लेखाचित्र को रेखांकित किया गया है।
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3.18 वचनखण्ड़ का लेखाचित्र
बैंकनोटों के लेन-देन के अवसर पर बिना किसी अपवाद के बैंकनोट देने वाला सदैव कोई व्यक्ति होता है तथा दिए गए बैंकनोट लेने वाला भी सदैव कोई व्यक्ति होता है। किसी संस्था की ओर से अथवा बहुसंख्य किन्हीं व्यक्तियों की ओर से बैंकनोटों का लेन-देन हो रहा हो तो भी उस संस्था या बहुसंख्य उन लोगों की ओर से कोई व्यक्ति उनका प्रतिनिधि बनकर बैंकनोटों के लेन-देन से संलग्न होता है।
परिवार, संस्था, उद्योग आदि व्यक्ति की भांति इकाई बनकर प्रस्तुत होते हैं। किसी व्यक्ति के लिए बैंकनोटों का जो अर्थ है और जिस प्रकार वह बैंकनोटों के लेन-देन से संलग्न (जुड़ता) होता है, किसी परिवार अथवा किसी संस्था या किसी उद्योग के लिए भी बैंकनोटों का वही अर्थ है और वह सब भी व्यक्ति (इकाई) की भांति बैंकनोटों के लेन-देन से संलग्न (जुड़ते) होते हैं।
बैंकनोटों के लेन-देन के प्रत्येक अवसर बैंकनोटों के लेन-देन के अन्य अवसर से भिन्न होते हैं चाहे व्यक्ति वहीं हों जो पूर्व में बैंकनोटों के लेन-देन के किसी अवसर पर रहे हों।
बैंकनोटों के लेन-देन के प्रत्येक अवसर पर बैंकनोट देता हुआ ‘व्यक्ति, परिवार, संस्था, उद्योग’ आदि प्रत्येक इकाई बैंकनोट व्यय करता है जिसके बदले में उस अनुपात (संगत) में प्रत्येक वह इकाई आवश्यक ‘वस्तु आदि’ की मांग रखता है।
बैंकनोट लेते हुए ‘व्यक्ति, परिवार, संस्था, उद्योग’ आदि प्रत्येक इकाई को बैंकनोटों की आय होती है, जिसके बदले में प्रत्येक इकाई उस अनुपात में आवश्यक ‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति करता है।
आय-व्यय के संगत मांग-पूर्ति बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड का विषय बाजार का घटनाक्रम है।
बैंकनोटों के लेन-देन में बैंकनोटों पर मुद्रित (लिखा) वचनखण्ड़ से व्यक्ति के लिए निर्धारित ‘वचन निर्वाह’ की …
आदर्श अवस्था में आय-व्यय के अन्तर्गत बैंकनोटों के लेन-देन में बदले में मांग-पूर्ति के अन्तर्गत ‘वस्तु आदि’ के आदान-प्रदान में किसी माप के बैंकनोटों के लेन-देन में बदले में निर्धारित उस मूल्य (माप) के ‘वस्तु आदि’ का आदान-प्रदान व्यक्ति करते हैं।
सर्वसामान्य अवस्था में बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड से निर्धारित ‘वचन निर्वाह’ के अन्तर्गत ‘वस्तु आदि’ का मूल्य जैसे-तैसे रुपए की इकाई में निर्धारित कर बदले में की जिस-तिस माप के बैंकनोटों का लेन-देन ‘व्यक्ति, परिवार, संस्था, उद्योग’ आदि इकाईयाँ करते हैं।
बैंकनोटों के लेन-देन के किसी अवसर पर बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड़ से व्यक्ति के लिए निर्धारित वचन निर्वाह के आदर्श अवस्था में तथा वचन निर्वाह के सर्वसामान्य अवस्था में व्यक्ति वचन का निर्वाह भिन्न प्रकार से करते हैं। दोनों ही अवस्थाओं में किसी व्यक्ति अथवा किसी परिवार अथवा किसी संस्था अथवा किसी उद्योग इकाई के मध्य उनके आय-व्यय के संगत मांग-पूर्ति का घटनाक्रम किस प्रकार का बनता है उसे रेखांकित किया जाए तो रेखांकन तीन चरणों में सम्पन्न होगा।
1) अन्तः चाप का रेखांकन (बैंकनोटों का व्यय)
2) बाह्य चाप का रेखांकन (बैंकनोटों की आय)
3) अन्तः- बाह्य चापों के मध्य रेखाओं का रेखांकन
3.19 अन्तः चाप का रेखांकन
मुद्रा का मान जितने रुपए हो उसे इकाई मानकर, किसी व्यक्ति ने किसी मास आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जितने रुपए व्यय किया है, उसे मुद्रा के मान की इकाईयों में व्यक्त करेंगे।
मान लिया मुद्रा का मान ’10 रुपए’ है और किसी व्यक्ति ने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी मास ‘10,000 रुपए’ व्यय किया है तो व्यय किए गए रुपए के लिए निर्धारित इकाईयाँ 1000 होंगी। 100 इकाईयों का एक सेन्टीमीटर मानकर 10 सेन्टीमीटर की त्रिज्या लेकर लेखाचित्र का अन्तः चाप खीचेंगे।
किसी व्यक्ति अथवा संस्था या किसी उद्योग के रुपए के व्यय को रेखांकित करने से पहले रुपए के व्यय के सम्बन्ध में स्पष्ट धारणा हमें लेनी होगी। जैसे दान, छात्रवृति, अनुदान आदि (दान आदि) के नाम पर दिए गए ‘रुपए’ उस व्यक्ति अथवा संस्था या किसी उद्योग के रुपए का व्यय कहलाएगा जिस किसी ने रुपए ‘दान आदि’ में दिया है। ‘दान आदि’ में प्राप्त रुपए को कोई व्यक्ति, संस्था अथवा उद्योग अपनी आय नहीं कह सकते और ‘दान आदि में प्राप्त रुपए उनके द्वारा दिए जाने पर वह उनका व्यय भी नहीं कहलाएगा।
हमें ध्यान रखना होगा कि आय-व्यय किसी सिक्के के दो पहलू हैं। एक के बिना दूसरे का अर्थ नहीं और उसका अस्तित्व भी नहीं है। रुपए व्यय करने से आय के अवसर बनते हैं। रुपए व्यय करने के अवसर आय के कारण बनते हैं। जिन रुपयों को देने पर उसे व्यय नहीं कहा जा सके वह रुपए किसी की आय नहीं होगी।
बैंकों में हो रहे रुपए का लेन-देन किसी का आय-व्यय नहीं बल्कि वह बैंकनोटों का साधारण लेन-देन है। ‘दान’ आदि में रुपए प्राप्त करना एवं प्राप्त उन रुपयों को दिया जाना साधारण बैंकनोटों का लेन-देन है। साधारण बैंकनोटों के लेन-देन का लेखाचित्र नहीं बनेगा। आय-व्यय के अन्तर्गत किए गए रुपए अथवा बैंकनोटों के लेन-देन का रेखांकन लेखाचित्र में होगा।
आदर्श अवस्था
सर्वसामान्य अवस्था
व्यक्ति द्वारा व्यय किए गए रुपए के लिए मुद्रा के मान के आधार पर निर्धारित इकाईयों की त्रिज्या लेकर लेखाचित्र का अन्तः चाप खीचेंगे। रुपए के व्यय के लेखांकन की विधि किसी मास या अन्य किसी अवधि के लिए जैसे दिन, सप्ताह वर्ष आदि के लिए भी हो सकता है एवं व्यक्ति के अतिरिक्त किसी परिवार, संस्था, उद्योग आदि इकाईयों के लिए भी समान रूप से वह विधि लागू होगा।
3.20 बाह्य चाप का रेखांकन
‘क्रयशक्ति माप’ की इकाई को आधार मानकर, उन इकाईयों में व्यक्ति के उस मास की आय को व्यक्त करेंगे जिस मास के व्यय को अन्तःचाप से दर्शाया गया है।
उदाहरण के लिए व्यक्ति के उस मास की आय ‘12,000 रुपए हो। मुद्रा का मान 10 रुपए होने की अवस्था में, व्यक्ति के क्रयशक्ति माप की इकाई 200 मुद्रा के लिए रुपए अर्थात् ‘2000 रुपए’ होगा। उस आधार पर व्यक्ति के 12,000 रुपए की आय के लिए निर्धारित इकाईयाँ 6 होंगी। अन्तः चाप की त्रिज्या में 6 सेन्टीमीटर जोड़कर 16 सेन्टीमीटर माप की त्रिज्या लेकर रेखाचित्र का बाह्य चाप खीचेंगे।
परिवार के प्रसंग में व्यक्ति पर आश्रित अन्य कुछ व्यक्ति होंगे। परिवार में एक से अधिक व्यक्तियों को रुपए की आय हो सकती है किन्तु कम से कम एक व्यक्ति को रुपए की आय अवश्य होगी। एक से अधिक कुछ व्यक्तियों में से एक भी व्यक्ति को रुपए की आय न होती तो उन व्यक्तियों को मिलाकर परिवार नहीं बनेगा बल्कि ऐसे व्यक्ति जिस अन्य व्यक्ति पर आश्रित होंगे उस अन्य व्यक्ति से सम्बन्धित परिवारों की आय अलग-अलग रेखांकित होगा।
किसी संस्था अथवा उद्योग आदि की आय को रेखांकित करने के प्रसंग में उनके अर्थसंकल्प (बजट) के आधार पर उन इकाईयों का वर्गीकरण करना होगा और प्रत्येक संस्था अथवा उद्योग आदि के क्रयशक्ति के माप की इकाई अलग-अलग निर्धारित करना होगा, जिसे आधार मानकर प्रत्येक संस्था अथवा उद्योग आदि की आय को रेखांकित करना होगा।
क्रयशक्ति माप की इकाई का आधार लेकर और उससे निर्धारित इकाईयों की त्रिज्या लेकर किसी व्यक्ति, संस्था, उद्योग आदि की रुपए में आय के आधार पर लेखाचित्र का बाह्य चाप खीचेंगे, जैसा कि ऊपर उदाहरण देकर समझाया गया है।
3.21 अन्तः बाह्य चापों के मध्य रेखाओं का रेखांकन
अन्तः चाप पर व्यक्ति के ‘वस्तु आदि’ की मांग और उसके संगत व्यक्ति द्वारा किए गए व्यय को दर्शाने वाले दो बिन्दु दर्शाए जाएँगे। दोनों बिन्दु उस माप में दूर अंकित होंगे जिस माप में व्यक्ति ने सेवाओं का आदान-प्रदान निर्धारित माप से कममाप में किया है।
बाह्य चाप पर व्यक्ति द्वारा ‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति और उसके संगत व्यक्ति की आय को दर्शाने वाले दो बिन्दु दर्शाए जाएँगे। दोनों बिन्दु उस माप में दूर अंकित होंगे जिस माप में व्यक्ति ने सेवाओं का आदान-प्रदान निर्धारित माप से कममाप में किया है।
आपूर्ति और उसके संगत आय को दर्शाने वाले दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी में वह माप और जुड़ जाएगा जो व्यक्ति के आय-व्यय के अन्तर से निर्धारित होता है। अन्तः बाह्य चापों पर अंकित बिन्दुओं की मध्यगत रेखा समान होगी।
व्यक्ति के आय-व्यय के अन्तर के माप को निर्धारित करने के लिए एवं जिस माप में व्यक्ति ने सेवाओं का आदान-प्रदान निर्धारित माप से कममाप में किया है, उस माप को निर्धारित करने के लिए व्यक्ति के ‘श्रममाप’ को आधार बनाना होगा। अक्षरमाप श्रम, शब्दमाप श्रम, वचनमाप श्रम, शब्दाक्षरमाप श्रम आदि ‘श्रममाप’ की इकाइयों हैं।
व्यक्ति चाहे कोई श्रमिक हो, व्यवसायी हो, व्यापारी हो अथवा कोई किसान ही क्यों न हो व्यक्ति के रुपए की आय को ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ में व्यक्त कर यह निर्धारित किया जा सकता है कि उसने कार्यसम्पन्न करने के लिए श्रम करने के लिए कितना समय व्यतीत किया है। व्यतीत समय का माप जो भी निर्धारित होगा उस आधार पर अन्तः बाह्य चापों के मध्य रेखाओं का रेखांकन होगा।
उदाहरण के लिए प्रतिमास की आय ‘3250 रुपए’ किसी व्यक्ति को प्रतिमास देना निर्धारित हो एवं किसी मास उस व्यक्ति को ‘2875 रुपए की आय हुई हो तो उस व्यक्ति ने उस मास अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए जितना श्रम किया है, उस श्रम का ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ एवं कार्य सम्पन्न करने के लिए श्रम करने के लिए व्यक्ति ने कितना समय व्यतीत किया है वह इस प्रकार निर्धारित होगा।
चूँकि 3250 रुपए, इसलिए 2875 रुपए, 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है। 22.115 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है। चूँकि 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए व्यक्ति के लिए 200 घण्टे का समय व्यतीत करना आवश्यक है। इसलिए 22,115 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए व्यक्ति के लिए 176 घण्टा 55 मिनट का समय व्यतीत करना आवश्यक है। अतएव ‘2875 रुपए की आय 176 घण्टा 55 मिनट समय व्यतीत करने से व्यक्ति को होती है। आय में प्राप्त ‘2875 रुपए में से मान लिया व्यक्ति ने 2750 रुपए व्यय किया है।
चूँकि 3250 रुपए इसलिए 2750 रुपए 25.000 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है। 21.153 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है। चूँकि 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए, व्यक्ति के लिए 200 घण्टे का समय व्यतीत करना आवश्यक है। इसलिए 21.153 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए, व्यक्ति के लिए 169 घण्टे 14 मिनट का समय व्यतीत करना आवश्यक है। अतएव ‘2750 रुपए का व्यय 169 घण्टे 14 मिनट के समतुल्य है।
व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय के पदों (Terms) में, उसके आय-व्यय का अन्तर 7 घण्टे 41 मिनट होगा।
कार्यसम्पन्न करने के लिए श्रम करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय का माप ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ में व्यक्त होकर व्यक्ति के आय-व्यय का अन्तर का यह माप बाह्य चाप में आपूर्ति के संगत आय के मध्य दूरी को रेखांकित करेगा।
‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ के प्रसंग में कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति जो भी समय व्यतीत करता है, वह कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय की आदर्श अवस्था होती है जिसे कार्य सम्पन्न करने के लिए नियत न्यूनतम समय अन्य शब्दों में कह सकते हैं, जो कोई भी व्यक्ति कार्य सम्पन्न करने के लिए अनिवार्य रूप से व्यतीत करेगा।
कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति जो भी समय व्यतीत करेगा वह कार्य सम्पन्न करने की आदर्श अवस्था में व्यतीत नियत न्यूनतम समय से कम नहीं होगा बल्कि समान होगा अथवा अधिक होगा।
दिए गए उदाहरण में मान लिया व्यक्ति (श्रमिक) कार्य सम्पन्न करने के लिए उस मास अवकाश आदि के अतिरिक्त ’23 कार्यदिवस’ की उपस्थिति दर्ज कराता है और इस कारण उसे उसके सेवाओं के लिए उस मास ‘3250 रुपए न देकर 2875 रुपए दिए गए हों तो कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति द्वारा दर्ज उपस्थिति 184 घण्टे (प्रति कार्यदिवस औसत 8 घण्टे) का समय होगा।
184 घण्टे का समय व्यतीत कर व्यक्ति ने 2875 रुपए की राशि की आय की है। जब कि कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय का माप 176 घण्टा 55 मिनट है। अतः कार्य सम्पन्न करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय का कममाप (अन्तर) 7 घण्टे 05 मिनट होगा।
दिए गए उदाहरण में व्यक्ति के आय-व्यय के अन्तर का माप ‘7 घण्टे 41 मिनट’ है। बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड़ से निर्धारित वचन निर्वाह का कममाप ‘7 घण्टे 05 मिनट’ है।
व्यतीत समय ‘5 घण्टे’ के समय की इकाई एक सेन्टीमीटर मान लिया जाए तो रेखांकन के अन्तः चाप पर ‘मांग और व्यय’ दर्शाने वाले दो बिन्दुओं के मध्य 1.42 सेमी (7 घण्टे 05 मिनट) की दूरी होगी।
बाह्य चाप पर ‘आपूर्ति और आय’ दर्शाने वाले दो बिन्दुओं के मध्य 2.96 सेमी (7 घण्टे 41 मिनट और 7 घण्टे 05 मिनट) की दूरी होगी।
सेवाएँ प्रदान करते हुए व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न होता है, उसे रुपए की आय होती है। आय में प्राप्त रुपए के व्यय से व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ के उपभोग से संलग्न होता है, उसे सेवाएँ अदा होती हैं। रुपए के आय-व्यय से संलग्न होकर व्यक्ति सेवाओं का आदान-प्रदान करता है। सेवाओं का आदान-प्रदान करते हुए व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ का उपभोग करता है एवं उत्पादन करता है।
व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ का उपभोग करता है, वह ‘वस्तु आदि’ का उत्पादन भी करता है इसलिए व्यक्ति की क्रयशक्ति बनती है। व्यक्ति की क्रयशक्ति का आधार वस्तुतः व्यक्ति की रुपए में आय तथा व्यय नहीं है, बल्कि ‘वस्तु आदि’ का उत्पादन उपभोग सुनिश्चित होने से व्यक्ति की क्रयशक्ति बनती है। अन्तः बाह्य चापों के मध्य बना क्षेत्र व्यक्ति की क्रयशक्ति को रेखांकित करता है।
अन्तः बाह्य चाप वक्र रेखा हैं। अन्तः बाह्य चापों के मध्य जो भी रेखांकन होगा, वह कोई वक्ररेखा होगा।
आय में प्राप्त रुपए को चूँकि व्यक्ति व्यय करता है, इसलिए अन्तः चाप पर दर्शाए गए मांग और उसके संगत व्यय को दर्शाने वाले दोनों बिन्दुओं को मिलाने वाली वक्र रेखा बाह्य चाप को स्पर्श करते हुए खींची जाएगी। इस वक्र रेखा का अधीनस्थ क्षेत्र व्यक्ति के ‘वस्तु आदि’ के उपभोग को रेखांकित करेगा, अर्थात् व्यक्ति को जो सेवाएँ अदा हुई है उसे रेखांकित करेगा।
बाह्य चाप पर दर्शाए गए आपूर्ति और उसके संगत आय को दर्शाने वाले दोनों बिन्दुओं को मिलाने वाली वक्र रेखा अन्तः चाप को स्पर्श करते हुए खींची जाएगी। इस वक्र रेखा का अधीनस्थ क्षेत्र व्यक्ति के उत्पादन को रेखांकित करेगा, अर्थात् व्यक्ति जिन सेवाओं को प्रदान करता है उसे रेखांकित करेगा।
व्यक्ति मास दर मास रुपए के आय-व्यय से निरन्तर संलग्न होता है। व्यक्ति निरन्तर सेवाओं का आदान-प्रदान करता है एवं निरन्तर ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन उपभोग से संलग्न होता है। अतएव अन्तः बाह्य अन्तहीन दो चापों के मध्य बना उपभोग क्षेत्र एवं उत्पादन क्षेत्र अपनी निरन्तरता के कारण किसी क्षेत्र तक सीमित न रहकर ‘कक्षा’ में स्थापित हो जाता है।
व्यक्ति बैंकनोटों के लेन-देन में यदि बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड़ से निर्धारित वचन का निर्वाह करता है अर्थात् बैंकनोटों के लेन-देन में निर्धारित सममाप में सेवाओं का आदान-प्रदान करता है एवं आय में प्राप्त बैंकनोटों को व्यय कर देता है तो व्यक्ति ने बाजार में सेवाओं का आदान-प्रदान निर्धारित सममाप में किया है कहा जाएगा।
अन्तः चाप पर मांग और उसके संगत व्यय को दर्शाने वाले बिन्दु सम्पाती होंगे। बाह्य चाप पर आपूर्ति और उसके संगत आय को दर्शाने वाले बिन्दु सम्पाती होंगे, अर्थात् किसी एक बिन्दु से दर्शाए जाएँगे।
एक बिन्दु से दर्शाए जाने पर भी सम्पाती दोनों बिन्दु मांग और उसके संगत व्यय को पृथक दर्शाएँगे एवं उन्हें मिलाने वाली वक्ररेखा जो बाह्य चाप को स्पर्श करेगी (प्रतिच्छेद नहीं करेगा) परिपूर्ण वृत्त को दर्शाएगा। उसी प्रकार से बाह्य चाप पर आपूर्ति और उसके संगत आय को दर्शाने वाले दोनों सम्पाती बिन्दुओं को मिलाने वाली वक्ररेखा जो अन्तः चाप को स्पर्श करेगी परिपूर्ण वृत्त को दर्शाएगा।
व्यक्ति के उपभोग क्षेत्र को दर्शाने वाला परिपूर्ण वृत्त एवं व्यक्ति के उत्पादन क्षेत्र को दर्शाने वाला परिपूर्ण वृत्त दोनों संपाती होंगे समतुल्य होंगे, जो व्यक्ति द्वारा आय-व्यय के अन्तर्गत बैंकनोटों के लेन-देन में सममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान को दर्शाता है यह परिपूर्ण वृत्त व्यक्ति के ‘श्रमक्षेत्र’ को दर्शाता है जिसे आय-व्यय के अन्र्तगत बैंकनोटों के लेन-देन में निर्धारित सममाप मे सेवाओं के आदान-प्रदान से कोई व्यक्ति सृजन करता है।
व्यक्ति बैंकनोटों के आय-व्यय में यदि निर्धारित माप से कममाप में सेवाओं का आदान-प्रदान करता है तो अन्तः चाप पर मांग और उसके संगत व्यय को दर्शाने वाले दोनों बिन्दु एक दूसरे से दूर होंगे। बाह्य चाप पर आपूर्ति और उसके संगत आय को दर्शाने वाले दोनों बिन्दु एक दूसरे से दूर होंगे।
व्यक्ति के उपभोग क्षेत्र को दर्शाने वाला वक्राकार क्षेत्र एवं व्यक्ति के उत्पादन क्षेत्र को दर्शाने वाला वक्राकार क्षेत्र एक दूसरे को प्रतिच्छेद करेंगे। प्रतिच्छेद करने से बना वह क्षेत्र जो दोनों में समान रूप से सम्मिलित है और सम्पाती है, समतुल्य है वह क्षेत्र व्यक्ति के ‘श्रमक्षेत्र’ को दर्शाता है. जिसे आय-व्यय के अन्तर्गत बैंकनोटों के लेन-देन में निर्धारित माप से कममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान से कोई व्यक्ति सृजन करता है।
‘व्यक्ति, परिवार, संस्था, उद्योग आदि’ किसी इकाई की आय समय की किसी अवधि में रुपए का जो कुछ माप है और वह इकाई समय के उसी अवधि में जिस माप में रुपए व्यय करता है तथा उस इकाई समय के आवश्यकताओं की पूर्ति में ‘वस्तु आदि’ की जो भी मांग बनती है तथा वह इकाई अन्य अनेक इकाईयों के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ‘वस्तु आदि’ की आपूर्ति जो कुछ करता है, उनसे सम्बन्धित मान रुपए की इकाई में लेकर रुपए पर मुद्रित वचनखण्ड से निर्धारित वचन निर्वाह का लेखाचित्र यदि रेखांकित किया जाए तो उस रेखांकन में बने ‘श्रमक्षेत्र’ के आधार पर यह निर्धारित किया जा सकता है कि स्वयं उस इकाई के लिए रोजगार के अवसर कितने उपलब्ध हुए एवं उस इकाई ने अन्य अनेक व्यक्तियों के लिए श्रम के अवसर (रोजगार) कितने बनाए।
‘श्रम क्षेत्र’ दर्शाने के उद्देश्य से बैंकनोटों पर मुद्रित वचनखण्ड़ का लेखाचित्र रेखांकित करना होगा।