व्यक्ति का परिश्रम

‘परि’ का तात्पर्य परिमाप अर्थात् सीमांकन से है,

कार्यविशेष कहने का तात्पर्य कार्य के सीमांकन से है,अर्थात् निश्चित किसी कार्य से है।

पात्रविशेष व्यक्ति कहने का तात्पर्य किसी व्यक्ति के तन, मन, बुद्धि आदि के सीमांकन से है।

व्यक्तिविशेष कहने का तात्पर्य जवाबदेही के सीमांकन से है, अर्थात् निश्चित किसी व्यक्ति से है।

कार्यविशेष को सम्पन्न (समापन) करने के लिए पात्रविशेष व्यक्ति (व्यक्ति विशेष) की नियुक्ति होती है।

श्रम करने के लिए प्रतिदिन का चौबीस घण्टे का समय व्यक्ति के लिए निर्धारित है और प्रतिदिन के उन चौबीस घण्टे का समय व्यतीत करना (सीमांकन) व्यक्ति की बाध्यता भी है। यह समय सीमांकन है। 

कार्य सम्पन्न करने के लिए कार्य पर उपस्थित किसी व्यक्ति (तन, मन) द्वारा प्रयुक्त बुद्धि (पात्रता) व व्यतीत समय का फ़लितांश (फलित अंश) उसका श्रम है।

व्यक्ति विशेष (सीमांकित) का कार्य निर्धारित (सीमांकित) हो एवं कार्य करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय निर्धारित (सीमांकित) हो तो व्यक्ति द्वारा किए गए श्रम को उसका ‘परिश्रम’ कहते हैं।

अनिवार्य रूप से व्यतीत हो रहे चौबीस घण्टों के समय (सीमांकित) में आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य (सीमांकित) करने के लिए व्यक्ति (निर्धारित) द्वारा किया गया श्रम (निर्धारित) उसका ‘परिश्रम’ है।

2.12 व्यक्ति का परिश्रम

व्यक्ति की आवश्यकताएँ विविध हैं और परिवर्तनीय भी हैं। निद्रा तथा विश्राम व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकता है। हमारा अस्तित्व इसलिए सुरक्षित नहीं है कि हम समुदाय में रहते हैं बल्कि इसलिए भी है कि हम अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा निद्रा तथा विश्राम में व्यतीत करते हैं। .

भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यक्ति समय व्यतीत करता है। व्यक्ति का स्नान, ध्यान आदि उसका व्यक्तिगत जीवन है, उसका पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन भी है जिसके लिए व्यक्ति समय व्यतीत करता है। शिक्षा, दीक्षा, स्वास्थ्य, खेल, साहित्य, संस्कृति, मनोरंजन, यातायात आदि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी व्यक्ति समय व्यतीत करता है।

व्यक्ति की आवश्यकताएँ तथा उन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करने के लिए व्यक्ति को उपलब्ध समय के बीच बने समीकरण के अन्तर्गत (कारण) व्यक्ति का श्रम उसका ‘परिश्रम कहलाता है। परिश्रम की दशा में व्यक्ति वही ‘श्रम’ करता है जो (श्रम) वह श्रम की दशा में करता है।

परिश्रम की दशा में व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम अथवा अधिकतम चौबीस घण्टे का समय व्यतीत करता है, जब कि श्रम करता हुआ व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय किसी भी माप में हो सकता है। श्रम की दशा में सम्पन्न कार्य व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति से सम्बन्धित हो सकते हैं अथवा नहीं भी हो सकते हैं।

परिश्रम की दशा में सम्पन्न कार्य व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति से सम्बन्धित होते हैं। परिश्रम की दशा में व्यक्ति वस्तुतः आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समय व्यतीत करता है और उसके लिए कार्य करता है, जब कि श्रम की दशा में व्यक्ति मात्र कार्य करने के लिए समय व्यतीत करता है।

श्रम की दशा से भिन्न दशा में व्यक्ति का श्रम ‘परिश्रम’ कहलाता है।

व्यक्ति का श्रम तथा उसके परिश्रम की दशा में अन्तर को समझने के लिए उदाहरण इस प्रकार है।

प्रतिदिन सूर्य को हम एक जैसा ही देखते हैं। सूर्यग्रहण के दिन सूर्य रोज जैसा नहीं दिखता है। रोज जैसा नहीं दिखने पर भी सूर्यग्रहण के दिन सूर्य वही रहता है। सूर्यग्रहण के दिन सूर्य जिस प्रकार दिखता है उस प्रकार सूर्य की दशा नहीं होती है। सूर्यग्रहण के दिन सूर्य उसी दशा में होता है जिस दशा में सूर्य अन्य दिनों में होता है। सूर्य की दशा में कोई परिवर्तन नहीं होने पर भी सूर्यग्रहण के दिन सूर्य भिन्न दशा में हमें दिखाई देता है।

जिस प्रकार सूर्य की परिक्रमा करता हुआ पृथ्वी एवं पृथ्वी की परिक्रमा करता हुआ चाँद की विशेष दशा में किसी स्थान पर सूर्यग्रहण दिखाई पड़ता है। उसी प्रकार प्रतिदिन अनिवार्य रूप से व्यतीत हो रहे चौबीस घण्टों के समय में अपने आवश्यकताओं की पूर्ति करने की व्यक्ति की ‘बाध्यता’ व्यक्ति की वह दशा है जब व्यक्ति का श्रम उसका परिश्रम बनकर प्रकट होता है। आवश्यकताओं की पूर्ति न होती हो तो व्यक्ति परिश्रम नहीं कर रहा होगा।

परिश्रम इन शब्दों में परिभाषित होगा

प्रतिदिन के समय सीमा में आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यक्ति द्वारा किया गया श्रम उसका ‘परिश्रम’ है।

2.13 परिश्रम का माप

आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 24 घण्टे का समय प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से प्रतिदिन उपलब्ध है और यह समय व्यक्ति के जीवन में प्रतिदिन अनिवार्य रूप से व्यतीत होते जाता है। व्यतीत समय के अनुपात में व्यक्ति के परिश्रम का माप निर्धारित होता है। 

किसी दिन किसी व्यक्ति के परिश्रम का माप शून्य हो सकता है, अर्थात् उस दिन व्यतीत 24 घण्टे के समय में उस व्यक्ति ने अपना अथवा अन्य किसी व्यक्ति के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य नहीं किया होगा।

व्यक्ति के परिश्रम का अधिकतम माप प्रतिदिन के 24 घण्टे के समय सीमा में होता है और चूँकि प्रत्येक व्यक्ति को 24 घण्टे का समय समान रूप से उपलब्ध है, इसलिए परिश्रम के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति जो अधिकतम श्रम करेगा, व्यक्ति के परिश्रम का अधिकतम माप प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान होगा।

व्यक्ति द्वारा व्यतीत समय का माप घण्टे, दिन, मास आदि में व्यक्त होता है। प्रतिदिन कार्य करने के लिए व्यक्ति द्वारा व्यतीत एक घण्टे के समय को ‘कार्यघण्टा’ कहते हैं और व्यक्ति द्वारा व्यतीत ‘8 घण्टे’ के समय को ‘कार्यदिवस’ कहते हैं। प्रतिमास औसत 25 कार्यदिवस एवं प्रति कार्यदिवस औसत 8 कार्यघण्टे अर्थात् प्रतिमास औसत 200 कार्यघण्टे का समय कार्य करने के लिए व्यक्ति व्यतीत करता है। कार्य करने के लिए व्यक्ति द्वारा प्रतिमास व्यतीत 200 कार्यघण्टे के समय को ‘कार्यमास’ कहेंगे।

कार्यघण्टे, कार्यदिवस, कार्यमास आदि व्यक्ति द्वारा व्यतीत घण्टा, दिन, मास आदि से भिन्न हैं। जैसे 5 व्यक्ति किसी कार्य को करने में प्रतिदिन 8 घण्टे का समय व्यतीत कर रहे हों और चार दिन कार्य करते हों तो कार्य करने के लिए 5 व्यक्ति प्रति व्यक्ति 4 कार्यदिवस अर्थात् 20 कार्यदिवस लगे कहा जाता है, जब कि व्यतीत चार दिनों (दिवस) में उन पांच व्यक्तियों ने कार्य किया है।

कार्यघण्टा, कार्यदिवस, कार्यमास आदि में घण्टा, दिन, मास आदि शब्दों का प्रयोग हुआ है, इसलिए ‘कार्यघण्टा, कार्यदिवस, कार्यमास’ और घण्टा, दिन, मास आदि में अन्तर प्रकट नहीं होता है।

संदर्भ आवश्यकताओं की पूर्ति का है जिसके लिए व्यक्ति परिश्रम करता है। कार्यघण्टा, कार्यदिवस, कार्यमास’ और घण्टा, दिन, मास आदि में अन्तर को दर्शाने के लिए कार्यघण्टा, कार्यदिवस, कार्यमास आदि का नामकरण भिन्न जिस प्रकार से करना होगा।

आवश्यकताओं की पूर्ति के संदर्भ में बैंकनोटों का महत्व है और बैंकनोटों के लेन-देन के प्रसंग में बैंकनोटों पर मुद्रित ‘मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूँ’ इस वचनखण्ड के कारण राज्य के अतिरिक्त स्वयं व्यक्ति के लिए निर्धारित ‘वचनबद्धता’ का महत्व है, जिस कारण व्यक्ति ‘परिश्रम’ करने के लिए वचनबद्ध होता है।

‘परिश्रम’ करने के लिए वचनबद्ध होने के बाद कार्य करने के लिए व्यक्ति अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है और इसके लिए व्यक्ति उसे ज्ञात ‘शब्दों’ का अनेक प्रकार से प्रयोग करता है। व्यक्ति को ज्ञात शब्द ‘अक्षरों के मिलने से बनते हैं और शब्दों को मिलाकर बना व्यक्ति का कथन उसका वचन (वचनबद्धता) होता है। ‘अक्षर, शब्द, वचन’ इन शब्दों का व्यापक अर्थ में प्रयोग करते हुए ‘अक्षरमाप, शब्दमाप, वचनमाप’ आदि नाम से व्यक्ति के ‘परिश्रम माप’ को व्यक्त कर सकते हैं।

कार्यघण्टे (एक घण्टा) का समय व्यतीत कर कार्यसम्पन्न करने से फलित व्यक्ति के श्रम के माप को ‘अक्षरमाप श्रम’ कहा जाए और कार्यदिवस (आठ कार्यघण्टे) का समय व्यतीत कर कार्य सम्पन्न करने से फलित व्यक्ति के श्रम के माप को ‘शब्दमाप श्रम’ कहा जाए तथा कार्यमास (25 कार्यदिवस) का समय व्यतीत कर कार्य सम्पन्न करने से फलित व्यक्ति के श्रम के माप को ‘वचनमाप श्रम’ कहा जाए एवं मान लिया कि व्यक्ति एक कार्यघण्टा का समय व्यतीत कर 100 अक्षरमाप श्रम करता है।

मान लिया प्रत्येक दिन कार्य पर आने व जाने के लिए कोई व्यक्ति प्रतिदिन औसत दो घण्टे का समय व्यतीत करता है, यह मानकर इन अतिरिक्त दो घण्टों के समय के बदले में व्यक्ति को प्रतिमास कुछ मासिक अवकाश दिया जाना मान लिया जाए और जिसे व्यक्ति के अर्जित व आकस्मिक अवकाश आदि कहा जाए तो औसत जिन दो घण्टों को व्यक्ति कार्य पर आने व जाने के लिए व्यतीत करता है एवं जिसके बदले उसे अवकाश दिया जाता है, उन दो घण्टों को व्यक्ति के 8 घण्टे के कार्यदिवस में जोड़कर ‘1000 अक्षरमाप श्रम’ (10 घण्टे) व्यक्ति का ‘शब्दमाप श्रम’ है कह सकते हैं।

व्यक्ति के अर्जित व आकस्मिक अवकाशों से तात्पर्य है कि अवकाश पर होने के बाद भी व्यक्ति को उन कार्यदिवसों के लिए बैंकनोट प्राप्त होते हैं।

एक वचनमाप श्रम 25 शब्दमाप श्रम के बराबर होगा।

एक शब्दमाप श्रम 1000 अक्षरमाप श्रम के बराबर होगा।

100 अक्षरमाप श्रम का तात्पर्य है, व्यक्ति ने कार्य सम्पन्न करने के लिए एक कार्यघण्टा का समय व्यतीत किया है।

1000 अक्षरमाप श्रम का तात्पर्य है, व्यक्ति ने कार्य सम्पन्न करने के लिए एक कार्यदिवस का समय व्यतीत किया है।

अक्षरमाप श्रम, शब्दमाप श्रम, वचनमाप श्रम आदि व्यक्ति के परिश्रम माप की इकाईयाँ हैं। अक्षरमाप श्रम, शब्दमाप श्रम, वचनमाप श्रम आदि के विभाजन से बचने के लिए व्यक्ति के परिश्रम माप को संयुक्त रूप से ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ में व्यक्त कर सकते हैं, जैसे 8 कार्यदिवस एवं अतिरिक्त 4 कार्यघण्टे को 8 शब्दमाप श्रम (8 कार्यदिवस) एवं 500 अक्षरमाप श्रम (4 कार्यघण्टे), इन्हें मिलाकर 8500 शब्दाक्षरमाप श्रम’ कह सकते हैं।

शब्दाक्षरमाप श्रम, ‘शब्दमाप श्रम अथवा अक्षरमाप श्रम या वचनमाप श्रम’ से भिन्न चौथी इकाई नहीं है बल्कि इनके संयुक्त माप को दर्शाने के लिए ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ लिख कर ‘परिश्रम माप’ को व्यक्त किया जा सकेगा।

‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति एक कार्यघण्टा (एक घण्टा) का समय व्यतीत कर ‘100 अक्षरमाप श्रम करेगा। एक कार्यदिवस (8 कार्यघण्टे) का समय व्यतीत कर ‘एक शब्दमाप श्रम’ करेगा। एक कार्यमास (25 कार्यदिवस) का समय व्यतीत कर ‘एक वचनमाप श्रम’ करेगा।

एक वचनमाप श्रम 25 शब्दमाप श्रम के बराबर होगा।

एक शब्दमाप श्रम 1000 अक्षरमाप श्रम के बराबर होगा।

एक वचनमाप श्रम 25000 शब्दाक्षरमाप श्रम के बराबर होगा।

किसी व्यक्ति ने किसी मास यदि 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम किया है तो निश्चय ही अवकाश आदि के अतिरिक्त 25 कार्यदिवस प्रति कार्यदिवस 8 कार्यघण्टे अर्थात् कुल 200 कार्यघण्टे का समय कार्य करने के लिए उस व्यक्ति ने उस मास व्यतीत किया है। किसी व्यक्ति को उसके प्रतिमास के सेवाओं के लिए जिस माप में बैंकनोट उसे प्रतिमास दिया जाना निर्धारित हो, बैंकनोटों का वह माप उस व्यक्ति का परिश्रम माप ‘25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम’ के समतुल्य होगा।

किसी व्यक्ति ने परिश्रम करता हुआ यदि 1,825 शब्दाक्षरमाप श्रम किया हो तो 1000 अक्षरमाप श्रम करने के लिए व्यक्ति एक कार्यदिवस अर्थात् 8 कार्यघण्टे का समय व्यतीत करेगा एवं शेष 825 अक्षरमाप श्रम करने के लिए व्यक्ति 6 कार्यघण्टे 36 कार्यमिनट का समय व्यतीत करेगा। 1,825 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए व्यक्ति कुल 14 कार्यघण्टे 36 कार्यमिनट का समय व्यतीत करेगा।

‘शब्दाक्षरमाप’ में व्यक्ति के परिश्रम का माप प्रस्तुत करने का उद्देश्य यही है कि यह निर्धारित किया जा सके कि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी कार्य को करने के लिए व्यक्ति ने कितना समय व्यतीत किया है। उदाहरण के लिए प्रतिमास के सेवाओं के लिए ‘3,250 रुपए’ किसी व्यक्ति को प्रतिमास देना निर्धारित हो एवं किसी मास उस व्यक्ति को ‘2,875 रुपए’ की आय हुई हो तो उस व्यक्ति ने उस मास अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए जितना परिश्रम किया है, उस परिश्रम का ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ ज्ञात कर परिश्रम करने के अन्तर्गत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करने के लिए व्यक्ति ने कितना समय व्यतीत किया है उसे निर्धारित किया जा सकता है।

व्यक्ति को उसके सेवाओं के लिए प्रतिमास जिस किसी माप में बैंकनोट (रुपए की इकाई) देना निर्धारित हो वह 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य होगा।

दिए गए उदाहरण में, चूँकि 3250 रुपए, 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है। इसलिए 2875 रुपए (बैंकनोटों का माप) 22,115 शब्दाक्षरमाप श्रम के समतुल्य है।

चूँकि 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए, व्यक्ति के लिए 200 कार्यघण्टे का समय व्यतीत करना आवश्यक है। इसलिए 22,115 शब्दाक्षरमाप श्रम करने के लिए 176 कार्यघण्टा 55 कार्यमिनट का समय व्यतीत करना व्यक्ति के लिए आवश्यक होगा।

अतएव 176 कार्यघण्टा 55 कार्यमिनट समय व्यतीत करने से व्यक्ति को ‘2875 रुपए’ की आय होती है। व्यक्ति ने उस मास कार्य करने के लिए इतना ही समय व्यतीत किया होगा।

व्यक्ति चाहे कोई श्रमिक हो, व्यवसायी हो, व्यापारी हो अथवा कोई किसान ही क्यों न हो व्यक्ति के बैंकनोटों की आय को ‘शब्दाक्षरमाप श्रम’ में व्यक्त कर यह निर्धारित किया जा सकता है कि उसने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करने के लिए कितना समय व्यतीत किया होगा।

परिश्रम माप ज्ञात करने की सामान्य विधि यही है कि जो भी कार्य करना किसी भी व्यक्ति के लिए निर्धारित है उन कार्यों को करने के नियत न्यूनतम समय निर्धारित हों अथवा कार्य करने के वांछित परिणाम निर्धारित हों और उनके आधार पर कार्य को करने वाले किसी व्यक्ति के परिश्रम का माप शब्दाक्षरमाप श्रम में ज्ञात किया जाए। कार्यविशेष किसी कार्य को करने के लिए नियत न्यूनतम समय अथवा कार्य करने के वांछित परिणाम कालान्तर में भिन्न प्रकार से निर्धारित हो सकते हैं।

परिश्रम करने के लिए व्यक्ति स्वयं पर निर्भर है तो उसका परिश्रम माप स्वयं उसके लिए होगा। परिश्रम करने के लिए व्यक्ति अन्य किन्हीं व्यक्तियों पर निर्भर है तो उसका परिश्रम माप अन्य उन व्यक्तियों के परिश्रम माप का औसत होगा। परिश्रम करता हुआ कोई व्यक्ति ऐसा भी हो कि स्वयं उसके लिए कार्य निर्धारित हों तथा वह अन्य किन्हीं व्यक्तियों के परिश्रम पर भी निर्भर हो तो उसका परिश्रम माप स्वयं उसके परिश्रम तथा अन्य उन व्यक्तियों के परिश्रम के माप का औसत परिश्रम माप होगा। किसी विद्यार्थी व शिक्षक के परिश्रम माप के उदाहरण का विचार यहाँ किया गया है।

शिक्षक के लिए कार्य निर्धारित है कि वह किन्हीं विद्यार्थियों को पाठ पढ़ाए। विद्यार्थियों के लिए कार्य निर्धारित है कि वह उनके लिए निर्धारित पाठ पढ़ें। पढ़ाए गए पाठों की परीक्षा विद्यार्थियों की होती है। विद्यार्थियों की परीक्षा किसी मास होती है और किसी मास नहीं भी होती है। उनकी परीक्षा किसी सप्ताह अथवा त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक या वार्षिक हो सकती है। किसी विद्यार्थी की जब भी परीक्षा होगी जिस सप्ताह अथवा मास, तीन मास में उसकी परीक्षा होगी उस अवधि तक विद्यार्थी ने पढ़ने के लिए पृथक कितना परिश्रम किया है, उसके उस परिश्रम का माप (परिश्रम माप) प्रस्तुत होगा।

मान लिया कि शैक्षणिक सत्र के प्रथम दो मास उपरान्त विद्यार्थी की परीक्षा होती है और उसे परीक्षा में 60% अंक प्राप्त होते हैं तो उसका ‘परिश्रम माप’ दो वचनमाप श्रम का 60% होगा। एक वचनमाप श्रम किसी भी व्यक्ति का वह परिश्रम माप है जब व्यक्ति 25,000 शब्दाक्षरमाप श्रम करता है। विद्यार्थी का परिश्रम माप (2×25,000×60%) 30,000 शब्दाक्षरमाप श्रम होगा। विद्यार्थी यदि दो या तीन प्रकार की पढ़ाई एक साथ कर रहा हो और प्रत्येक के लिए पृथक परीक्षा और उनका परीक्षाफल  प्रकाशित हुआ हो तो भी विद्यार्थी के परिश्रम का माप पूर्व की भांति ज्ञात किया जा सकता है।

विधि वही होगी, समय की जिस अवधि के बाद कोई परीक्षा हो उस परीक्षा के परीक्षाफल पर आधारित विद्यार्थी का परिश्रम माप ज्ञात कर पूर्व के उसके परिश्रम माप को साथ लेकर किसी शैक्षणिक सत्र में एक प्रकार के पढ़ाई में विद्यार्थी ने पढ़ने के लिए कितना परिश्रम किया है, यह ज्ञात किया जा सकता है। एक से अधिक प्रकार के पढ़ाई में विद्यार्थी के परिश्रम माप का औसत उस शैक्षणिक सत्र में उसके परिश्रम का माप होगा।

परिश्रम करने के लिए विद्यार्थी पाठों को पढ़ने पर निर्भर हैं। परिश्रम करने के लिए शिक्षक किन्हीं विद्यार्थियों के परिश्रम पर निर्भर हैं। अतएव विद्यार्थियों का परिश्रम माप जहाँ स्वयं उन्हीं पर निर्भर है कि वह कितना कम अथवा अधिक परिश्रम करें, इसके विपरीत शिक्षक का परिश्रम माप विद्यार्थियों के परिश्रम माप पर निर्भर है। अतएव शिक्षक का परिश्रम माप ज्ञात करना किसी विद्यार्थी के परिश्रम माप ज्ञात करने से भिन्न होगा।

मान लिया कोई शिक्षक किन्हीं चार कक्षाओं में किन्हीं विद्यार्थियों को उनके लिए निर्धारित पाठ पढ़ा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी का परिश्रम माप ज्ञात है। किसी कक्षा के किन्हीं विद्यार्थियों का औसत परिश्रम माप ज्ञात होगा। चारों कक्षाओं में पढ़ रहे किन्हीं विद्यार्थियों का औसत परिश्रम माप भी ज्ञात होगा। विद्यार्थियों का औसत परिश्रम माप शिक्षक का ‘परिश्रम माप’ होगा।

उदाहरण के लिए विद्यार्थियों का औसत परिश्रम माप शैक्षणिक सत्र के किसी अवधि या सम्पूर्ण सत्र के लिए 15,000 शब्दाक्षरमाप श्रम है तो यह शिक्षक का परिश्रम माप होगा और इससे यह स्पष्ट होगा कि शिक्षक ने प्रतिमास औसत 15 कार्यदिवस (1000 शब्दाक्षरमाप श्रम-एक कार्यदिवस के समतुल्य) का समय व्यतीत कर उसने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए परिश्रम किया होगा।

पढ़ने-पढ़ाने के अतिरिक्त भी विद्यार्थी और शिक्षक परिश्रम करेंगे। उनके उस परिश्रम का माप भी उन कार्यों के वांछित परिणाम जानकर अथवा उन कार्यों को करने के लिए नियत न्यूनतम समय जानकर किया जा सकता है। प्रत्येक परिस्थिति में प्रत्येक विद्यार्थी अथवा प्रत्येक शिक्षक या किसी भी अन्य व्यक्ति के सब प्रकार के परिश्रम का औसत माप प्रतिमास अधिकतम एक वचनमाप श्रम होगा और प्रतिदिन अधिकतम एक शब्दमाप श्रम होगा और प्रतिघण्टा अधिकतम 100 अक्षरमाप श्रम होगा। व्यक्ति के परिश्रम का अधिकतम माप प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान होगा।

उद्योग इकाईयों में कार्यरत कर्मचारी व अधिकारी व्यक्तियों का परिश्रम माप भी उसी प्रकार ज्ञात किया जा सकता है जैसे विद्यार्थी व शिक्षक का परिश्रम माप ज्ञात किया गया है। सरकारी अथवा गैरसरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारी तथा दूरसंचार अथवा विद्युत कर्मियों का परिश्रम माप भी विद्यार्थी व शिक्षक या अन्य किसी भी व्यक्ति के परिश्रम को मापने की भांति ही उन कर्मचारियों अथवा कर्मियों का परिश्रम माप, प्रतिमास, प्रतिदिन या प्रतिघण्टे के लिए निर्धारित किया जा सकता है।

परिश्रम माप ज्ञात करने की विधि वही होगी, जैसे व्यक्ति का कार्य निर्धारित होगा और कार्य करने के लिए नियत न्यूनतम समय निर्धारित होगा तथा कार्य करने का वांचित परिणाम भी निर्धारित होगा। निर्धारित कार्य, निर्धारित न्यूनतम समय, निर्धारित परिणाम, इन तीन विषयों के आधार पर व्यक्ति के परिश्रम का माप निर्धारित किया जा सकेगा।

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