उत्पादकता का सम्बन्ध किसी माप से अवश्य है, किन्तु वह स्वयं कोई माप नहीं है जिसे मापा जाए।
उत्पादकता जैसा कि उसे मापा जाता है, उसे मापा नहीं जाना चाहिए, क्योंकि उत्पादकता माप है ही नहीं।
उत्पादकता वस्तुतः किसी माप का मापदण्ड है। उदाहरण के लिए लोगों की BP (Blood Pressure) 120/80 के सीमा (Range) में होना चाहिए, यह किसी भी व्यक्ति के BP का मापदण्ड है।
किसी व्यक्ति के BP का माप 140/90 हो सकता है,
उस व्यक्ति के BP का माप 120/80 भी हो सकता है। माप जो भी हो मापदंड, माप से भिन्न विषय है।
किसी माप के पांच तत्वों में से एक तत्व मापदण्ड है। माप और मापदंड के अतिरिक्त अन्य तीन तत्व हैं, माप की इकाई, माप का साधन, माप का मानक। उत्पादकता के सन्दर्भ में माप की इकाई रुपए है, माप का साधन बैंकनोट है, माप का मानक मुद्रा है, माप स्वयं लोगों के सेवाओं का माप है और मापदण्ड है सममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान की लोगों की वचनबद्धता जो बैंकनोटों पर लिखा “मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूं” इस वचन से लोगों के लिए स्वयं रिज़र्व बैंक ने निर्धारित किया है।
बैंकनोटों के लेन-देन में सममाप में सेवाओं केआदान-प्रदान की वचनबद्धता उत्पादकता की चर्चा करेंगे।
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4.06 मापदण्ड़ है उत्पादकता
लक्षण व्यापक अर्थ में कोई अवधारणा (Concept) है। उदाहरण के लिए ग्लास, कटोरी अथवा थाली आदि पात्रों के आकार उनके लक्षण हैं। आकार देखकर अर्थात् लक्षण से यह बताया जा सकता है कि कौन सा पात्र ग्लास है अथवा कौन सा पात्र कटोरी है या थाली है। भिन्न पात्रों के आकार उन पात्रों के लक्षण हैं और वह लक्षण उन पात्रों के सम्बन्ध में व्यक्ति की बनी अवधारणा है।
लक्षण गणितीय हो तो गणितीय विषय में लक्षण ‘मापदण्ड’ कहलाते हैं। मापा जाना गणितीय विषय है, माप आधारित लक्षण को मापदण्ड कहते हैं। मापदण्ड़ का आधार लेकर मापे गए माप का विश्लेषण किया जाता है।
उदाहरण के लिए व्यक्ति के रक्त में होमोग्लोबिन 12 से 16 इकाईयाँ होना रक्त में होमोग्लोबिन का मापदण्ड है। किसी व्यक्ति के रक्त में होमोग्लोबिन कम हो सकता है, जैसे मान लिया 8 इकाई है, किन्तु रक्त में होमोग्लोबिन का मापदण्ड़ 12 से 16 इकाईयाँ ही होगा।
वयस्क किसी व्यक्ति के कद के लक्षण के सम्बन्ध में यह मान लिया जाता है कि वह 5 से 6 फीट लम्बाई का होगा। अन्य शब्दों में वयस्क व्यक्ति का 5 से 6 फीट ऊँचा होना वयस्क किसी व्यक्ति के कद का मापदण्ड (लक्षण) है। 4 फीट 8 इंच उँचाई का वयस्क व्यक्ति सामान्य से छोटे कद का माना जाता है। व्यक्ति की उँचाई 6 फीट 5 इंच हो तो वयस्क वह व्यक्ति सामान्य से लम्बे कद का माना जाता है। किसी वयस्क व्यक्ति के कद के सम्बन्ध में 5 से 6 फीट की उसकी ऊँचाई मान लेना वयस्क व्यक्ति के सम्बन्ध में हमारा कोई विचार अथवा अवधारणा ही है।
मापदण्ड कोई अवधारणा है,यह गणितीय अवधारणा है। मापने के प्रसंग में निश्चित एक माप और उस माप की इकाई और माप का मानक तथा माप का पैमाना एवं माप का मापदण्ड आदि पांच तत्व हैं।
उदाहरण के लिए – किसी व्यक्ति की लम्बाई मापना हो तो माप की इकाई ‘फीट’ लिया जाता है। फीट किसी लम्बाई को मापने की इकाई है। एक फीट में 12 इंच और एक इंच में 8 सूत तथा 3 फीट का एक गज एवं 1760 गज का एक मील (ईच से मील) माप का यह पैमाना है।
अर्राष्ट्रीय मानक संस्थान में रखे गए उस दंड़ (छड) की लम्बाई एक फीट है, जिसे हर कोई मानता है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य उस छड़ की लम्बाई फीट माप का मानक है। फीट माप के मानक पर आधारित पैमाने से किसी वयस्क व्यक्ति की ऊँचाई मापी गई हो और वह 4 फीट 8 इंच मापी गई हो तो यह 4 फीट 8 इंच उस व्यक्ति के उँचाई का माप है। किसी वयस्क व्यक्ति की उँचाई 5 से 6 फीट होना वयस्क किसी व्यक्ति के कद का मापदण्ड़ है।
बैंकनोटों पर मुद्रित ‘मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूँ’ इस वचनखण्ड़ से व्यक्ति के लिए निर्धारित वचनबद्धता या कहें अन्य शब्दों में बैंकनोटों के लेन-देन के प्रत्येक अवसर पर सममाप में …. सेवाओं के आदान-प्रदान की व्यक्ति की वचनबद्धता वस्तुतः उत्पादक किसी व्यक्ति का वह लक्षण है जिसे उसकी उत्पादकता कहते हैं। इस लक्षण विशेष के कारण उत्पादक बने रहने की सम्भावनाएँ व्यक्ति के लिए बनती हैं।
इन पंक्तियों में जिसे उत्पादकता कहा गया है, वह व्यक्ति का लक्षण है। उत्पादकता कोई माप भी नहीं है। उत्पादकता मापदण्ड है, एक गणितीय अवधारणा है।
मापदण्ड उत्पादकता के संदर्भ में – माप स्वयं लोगों के सेवाओं का माप है और मापदण्ड है सममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान की लोगों की वचनबद्धता, माप की इकाई ‘रुपए‘ है, माप का मानक है ‘मुद्रा का मान‘ और माप का पैमाना है व्यक्ति को उसके सेवाओं के बदले दिए जाने वाले ‘बैंकनोट’।
किसी ‘माप’ की चर्चा जब हम करें तो उस माप की कोई इकाई होगी और उस माप का निज ‘मानक’ होगा तथा उस माप का एक पैमाना होगा एवं ‘मापदण्ड होगा जिसका आधार लेकर माप के सही/गलत का विश्लेषण होगा।
4.07 उत्पादकता है क्या ?
उत्पादकता के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा करते हुए हमने लिखा है कि- लक्षण विशेष है उत्पादकता और निर्धारित सममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान की व्यक्ति की वचनबद्धता उत्पादकता है।
उपरोक्त भिन्न कथनों का एक अर्थ है और वह अर्थ उत्पादकता है, जिसकी चर्चा हम यहाँ करेंगे।
जब हम लक्षण विशेष को उत्पादकता कहते हैं तो व्यक्ति के उस लक्षण की हम बात करते हैं, जिसके होने से व्यक्ति उत्पादक बना रहता है। उत्पाद उत्पन्न करने वाला व्यक्ति उत्पादक है। व्यक्ति उत्पादक बना रहे इसका तात्पर्य है कि उत्पाद उत्पन्न करने का अवसर व्यक्ति को मिलता रहे।
वस्तु, संसाधन, सेवाएँ आदि के स्वामित्व हस्तांतरण को हमने उत्पाद उत्पन्न करना कहा है।
बैंकनोट देकर ‘वस्तु आदि’ क्रय करने मात्र से ‘वस्तु आदि’ के विक्रेता से ‘वस्तु आदि’ का स्वामित्व ‘वस्तु आदि’ क्रय करने वाले व्यक्ति को हस्तांतरित होकर ‘वस्तु आदि’ उत्पन्न हुआ कहा जाता है।
बैंकनोट देकर ‘वस्तु आदि’ क्रय करने वाला व्यक्ति उत्पादक हुआ। व्यक्ति उत्पादक बना रहे इसका तात्पर्य है कि बैंकनोट देने के अवसर व्यक्ति के लिए सदैव बने रहें जिससे कि व्यक्ति ‘वस्तु आदि’ क्रय करता रह सके।
व्यक्ति बैंकनोट तभी दे सकेगा जब उसने बैंकनोट लिया हो। व्यक्ति बैंकनोट तभी ले सकेगा जब वह किसी ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न हो। ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति अपनी सेवाएँ प्रदान कर बदले में बैंकनोट लेता है। ‘वस्तु आदि’ के उत्पादन से संलग्न व्यक्ति उत्पादक है।
व्यक्ति उत्पादक बना रहे इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति को सेवाएँ प्रदान करने के अवसर मिलता रहे और उन अवसरों पर उसे बैंकनोट मिलता रहे। व्यक्ति उत्पादक बना रहे इसके लिए आवश्यक है कि बैंकनोट देने के अवसर व्यक्ति के लिए बने रहें और व्यक्ति को बैंकनोट मिलता भी रहे।
बैंकनोट देने के अवसरों पर व्यक्ति किसी उत्पाद को उत्पन्न कर उत्पादक बना रहेगा। बैंकनोट लेने के अवसरों पर व्यक्ति किसी उत्पाद के उत्पादन से संलग्न होकर उत्पादक बना रहेगा।
मापदण्ड़ उत्पादकता के संदर्भ में उत्पादकता वह लक्षण विशेष है, जिस लक्षण विशेष के कारण व्यक्ति उत्पादक बना रहता है।
बैंकनोटों के लेन-देन में बदले में वस्तु, संसाधन, सेवाओं के आदान-प्रदान में निर्धारित सममाप में सेवाओं के आदान-प्रदान की वचनबद्धता वस्तुतः उत्पादकता है।
बैंकनोटों पर मुद्रित (लिखा) ‘मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूँ‘ इस वचनखण्ड से तथा ‘केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्याभूत‘ इस अन्य वचनखण्ड़ से केन्द्र सरकार, रिज़र्व बैंक एवं व्यक्ति के लिए निर्धारित वचनबद्धता का निर्वाह होने से उत्पादकता की उपलब्धियाँ सुनिश्चित होती है।