केन्द्र अथवा राज्य सरकारों के लिए रिज़र्व बैंक, बैंकनोट नहीं छापता।
बैंकनोटों के लेन-देन से लोग वस्तु या सेवाएँ आदि का आदान-प्रदान कर अपने आवश्यकताओं की पूर्ति लोग कर सकें, इसके लिए रिज़र्व बैंक बैंकनोट छापता है।
इसलिए, जब बात बैंकनोटों की होगी
- बैंकनोटों पर लिखे “मैं धारक को रुपए अदा करने का वचन देता हूं” तदनुसार लोगों के प्रति रिज़र्व बैंक के जवाबदेही की बात होगी।
- बैंकनोटों पर लिखे “केन्द्रीय सरकार द्वारा प्रत्याभूत” तदनुसार लोगों के प्रति केन्द्र सरकार के जवाबदेही की भी बात होगी।
- बैंकनोटों के धारक लोगों के प्रति उनके दिए गए बैंकनोटों को लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति (मैं) के जवाबदेही की भी बात होगी।
तीनों तीन विषय हैं
बैंकनोटों का लेन-देन और रुपयों का लेन-देन तथा मुद्रा का लेन-देन
-
बैंक खाते में बैंकनोट जमा करना या उस खाते से बैंकनोट लेना,
अर्थात् खाता-बही बैंकनोटों के लेन-देन का विषय है।
-
वेतन या वस्तु, संसाधन, सेवाएँ आदि के बदले दिए गए बैंकनोटों से जब किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा किन्हीं सेवाओं का मूल्य रुपयों में निर्धारित होता है तो वह बैंकनोट रुपए कहलाते हैं।
अर्थात् 'वस्तु आदि' का मूल्य निर्धारण रुपयों के लेन-देन का विषय है।
-
निर्धारित रुपए मूल्य के वस्तु, संसाधन, सेवाएं आदि के आदान-प्रदान से बदले में बैंकनोटों के लेन-देन से लोगों के आवश्यकताओं की पूर्ति होने से वह रुपए बने बैंकनोट मुद्रा कहलाते हैं।
अर्थात् लोगों के आवश्यकताओं के पूर्ति मुद्रा के लेन-देन का विषय है।
‘मुद्रामंत्र’ का विषय
रुपए के लेन-देन को सुधारो, समस्याओ का समाधान होगा 
-
सामाजिक आर्थिक समस्याओं का सम्बन्ध रुपयों के लेन-देन से होता है,
परन्तु रुपए क्या है? लोग नहीं जानते,क्योकि अर्थशात्र में लिखा नहीं है।
पूछने पर रिज़र्व बैंक या अन्य कोई बैंक रुपए का अर्थ नहीं बताएगा।
-
आर्थिक समस्याओं का समाधान करता हुआ, अर्थशास्त्री नहीं मिलेंगे,
क्योंकि अर्थशास्त्र और सम्बंधित विषय अर्थशास्त्र में परिभाषित नहीं है।
अर्थशास्त्र पढ़े लिखे व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का समाधान
करने के अवसर या इसके लिए अर्थशास्त्रियो को रोजगार नहीं मिलता।
-
रुपए और अर्थशास्त्र से सम्बंधित विषय स्पष्ट हो जाएं,
तो रुपयों के लेन-देन में सुधार होकर प्रथम व्यक्ति सुधरेगा,
अनन्तर संस्थाएं, समाज और सरकारी महकमों के सुधरने से,
लोगों के सब प्रकार के आर्थिक सामाजिक समस्याओं का समाधान होगा।
- जैसे मिट्टी (व्यक्ति) से ईट (संस्था) , ईटों से भवन (समाज) , भवन में साजो सामान जुटाने (सरकार) से लोगों के आवास की समस्या का समाधान होता है।
रुपयों के लेन-देन से सम्बन्धित विषय

शोधकर्ता : जी जगन्नाथ राजू
जन्म - वर्ष 1949, माता - राजेश्वरी,
पिता - लक्ष्मीपति राजू
गांव - नक्कपल्ली, जिला - अनकापल्ली, आंध्रप्रदेश.
स्नातक (विज्ञान), वर्ष - 1971,
रांची विश्वविधालय, झारखण्ड.
टाटा टिनप्लेट से वर्ष 2000 में क्वालिटी विभाग से सेवानिवृत.
कार्यकाल के दौरान अर्थशास्त्र को परिभाषित करने का व्रत लिया.
निरंतर 25 वर्षो का अध्धयन, अनवरत अनेक मंचो पर संवाद तथा विषय पर,
टाटा टिनप्लेट प्रबंधन एवं राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद व भारतीय रिजर्व बैंक से पत्राचार,
करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि "रुपए के लेन-देन को सुधारो, समस्याओ का समाधान होगा .